बाहर का तला-भुना, बासी या दूषित खाना खाने के बाद कई बार फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है। इस दौरान पेट में तेज दर्द, मरोड़ और ऐंठन के साथ उल्टी, दस्त, कमजोरी और कभी-कभी बुखार जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं। फूड पॉइजनिंग होने पर शरीर दूषित पदार्थों को बाहर निकालने की कोशिश करता है, जिसके कारण पाचन तंत्र पर असर पड़ता है और पेट में दर्द व ऐंठन महसूस हो सकती है। ऐसे में कुछ सावधानियां अपनाकर परेशानी को कम किया जा सकता है।
1. शरीर में पानी की कमी न होने दें
उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन की वजह से कमजोरी और पेट की ऐंठन बढ़ सकती है। इसलिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ORS का घोल लेते रहें। एक साथ बहुत अधिक पानी या तरल पदार्थ पीने के बजाय हर कुछ मिनट में छोटे-छोटे घूंट लेना बेहतर रहता है। नारियल पानी भी लिया जा सकता है।
2. हल्का और आसानी से पचने वाला खाना खाएं
फूड पॉइजनिंग के दौरान पाचन तंत्र को आराम देना जरूरी होता है। इस समय मूंग दाल की पतली खिचड़ी, उबले चावल, केला, दलिया और टोस्ट जैसे हल्के खाद्य पदार्थ लिए जा सकते हैं। जब तक पेट पूरी तरह ठीक न हो, तब तक तला-भुना और बहुत मसालेदार खाना खाने से बचें।
इसके अलावा दूध और अन्य डेयरी उत्पाद, कैफीन वाले पेय और बहुत अधिक मीठे जूस भी कुछ लोगों में पेट की परेशानी बढ़ा सकते हैं। इसलिए लक्षणों के दौरान इनसे दूरी रखना बेहतर हो सकता है।
3. पेट की सिकाई से मिल सकती है राहत
पेट में ऐंठन या मरोड़ होने पर हल्के गर्म पानी की थैली या हीटिंग पैड से कुछ समय के लिए सिकाई की जा सकती है। करीब 15 से 20 मिनट तक हल्की गर्माहट पेट की मांसपेशियों को आराम देने में मदद कर सकती है। हालांकि बहुत ज्यादा गर्म सिकाई करने से त्वचा जल सकती है, इसलिए तापमान का ध्यान रखें।
4. बिना सलाह के दवा लेने से बचें
फूड पॉइजनिंग के दौरान दस्त रोकने वाली दवाएं खुद से लेना हमेशा उचित नहीं होता। कुछ परिस्थितियों में ऐसी दवाएं आंतों की गतिविधि को धीमा कर सकती हैं। इससे बीमारी के कारण और स्थिति के अनुसार समस्या बढ़ सकती है। पेट में बहुत ज्यादा दर्द या लगातार ऐंठन होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर ही दवा लें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर पेट दर्द बहुत तेज हो या लगातार बढ़ता जाए, बार-बार उल्टी हो, पानी तक शरीर में न टिक रहा हो, मल में खून दिखाई दे, बहुत ज्यादा कमजोरी या चक्कर महसूस हों, पेशाब काफी कम हो जाए या तेज बुखार हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक हो सकता है।
फूड पॉइजनिंग के दौरान आराम, पर्याप्त तरल पदार्थ और हल्का भोजन महत्वपूर्ण हैं। लेकिन अगर लक्षण गंभीर हों या लगातार बने रहें, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

