16 Sep 2026, Wed

मथुरा में 19 साल से बंद पड़ी चीनी मिल में लगेगा इथेनॉल प्लांट, हर साल होगा 3.96 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन

 

उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में लंबे समय से बंद पड़ी एक चीनी मिल को अब नए प्रोजेक्ट के जरिए दोबारा उपयोग में लाने की तैयारी है। छाता स्थित करीब 19 साल से बंद चीनी मिल परिसर में इथेनॉल प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी मिल गई है। प्रस्ताव के मुताबिक प्लांट में गन्ने के साथ-साथ मक्का और धान से भी इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा।

मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 23 प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इसी दौरान छाता की बंद चीनी मिल में इथेनॉल प्लांट स्थापित करने के प्रस्ताव को भी स्वीकृति दी गई।

19 साल से बंद है छाता की चीनी मिल

मथुरा के छाता क्षेत्र में स्थित चीनी मिल करीब 19 साल पहले बंद हो गई थी। अब इसी परिसर में इथेनॉल उत्पादन की नई इकाई स्थापित करने की योजना बनाई गई है। परियोजना में उपलब्ध जमीन का इस्तेमाल प्लांट के साथ-साथ अन्य जरूरी सुविधाओं के विकास के लिए किया जाएगा।

बताया गया है कि इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 96 एकड़ जमीन उपलब्ध है। परियोजना के तहत गोदाम और अन्य परिसर विकसित करने की भी योजना है। इससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद जताई गई है।

साल में 11 महीने चलेगा प्लांट

प्रस्तावित इथेनॉल प्लांट को साल में करीब 11 महीने संचालित करने की योजना है। इस दौरान लगभग 3.96 करोड़ लीटर इथेनॉल का उत्पादन किया जाएगा। प्लांट की स्थापना पर 200 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है।

इथेनॉल बनाने के लिए सबसे पहले गन्ने का इस्तेमाल किया जाएगा। जब गन्ने की उपलब्धता कम या समाप्त हो जाएगी, तब उत्पादन को जारी रखने के लिए मक्का और धान का इस्तेमाल किया जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्लांट को लंबे समय तक संचालित रखना है।

गन्ना किसानों को भी मिलेगा फायदा

परियोजना से गन्ना किसानों को भी लाभ मिलने की बात कही गई है। संबंधित मंत्री के अनुसार, चीनी मिल को दोबारा संचालित करने के लिए बड़ी मात्रा में गन्ने की आवश्यकता होती, जबकि इथेनॉल प्लांट में गन्ने के साथ वैकल्पिक फसलों का भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।

जानकारी के मुताबिक, क्षेत्र में पिछले दो वर्षों से किसानों के लिए गन्ने के तीन क्रय केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में प्लांट शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद और उससे जुड़े कारोबार को भी गति मिलने की उम्मीद है।

नोएडा एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी का भी फायदा

छाता की लोकेशन को भी इस परियोजना के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है। यह क्षेत्र नेशनल हाईवे से जुड़ा हुआ है और यहां से नोएडा एयरपोर्ट के कार्गो टर्मिनल तक पहुंचने में करीब 40 मिनट लगने की बात कही गई है। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण परियोजना में लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई से जुड़ी संभावनाएं भी देखी जा रही हैं।

प्रस्ताव के तहत मुख्यमंत्री द्वारा इसी साल इथेनॉल प्लांट का शिलान्यास किए जाने की बात भी कही गई है। प्लांट के शुरू होने के बाद मथुरा के इस क्षेत्र में इथेनॉल उत्पादन के साथ रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

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