फिल्म ‘हनुमान अंश’ की चर्चा इन दिनों इसकी कहानी और सफलता के साथ-साथ इसकी युवा प्रोड्यूसर अनुप्रिया नागर को लेकर भी हो रही है। महज 21 साल की उम्र में फिल्म निर्माण से जुड़ी अनुप्रिया ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमा-पूंजी का बड़ा हिस्सा लगा दिया। उन्होंने बताया कि फिल्म से जुड़ने का फैसला उनके लिए सिर्फ आर्थिक निवेश नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरा भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव था।
नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी आध्यात्मिक विरासत से प्रेरित इस फिल्म ने रिलीज के बाद धीरे-धीरे दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई। शुरुआत में फिल्म को लेकर ज्यादा प्रचार देखने को नहीं मिला, लेकिन दर्शकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद इसकी चर्चा बढ़ती चली गई। फिल्म की सफलता के बीच अब इसकी युवा प्रोड्यूसर की कहानी भी लोगों का ध्यान खींच रही है।
पोस्ट-प्रोडक्शन के दौरान फिल्म से जुड़ीं अनुप्रिया
अनुप्रिया नागर के मुताबिक, जब उन्होंने फिल्म के प्रोजेक्ट में कदम रखा, तब तक इसकी शूटिंग और मुख्य निर्माण का काम पूरा हो चुका था। उस समय फिल्म के पोस्ट-प्रोडक्शन के लिए अतिरिक्त फंड की जरूरत थी। फिल्म की कहानी और उसके आध्यात्मिक विषय ने अनुप्रिया को इतना प्रभावित किया कि उन्होंने अपनी बचत इस प्रोजेक्ट में लगाने का फैसला कर लिया।
उन्होंने बताया कि फिल्म का निर्माण तीन महिलाओं ने मिलकर किया है और वह उनमें सबसे कम उम्र की प्रोड्यूसर हैं। हालांकि, फिल्म का पूरा बजट उन्होंने अकेले नहीं उठाया। उनके मुताबिक कुल बजट में उनकी हिस्सेदारी करीब एक-तिहाई रही। इसके बावजूद अपनी मेहनत से जुटाई गई बचत को इतने बड़े प्रोजेक्ट में लगाना उनके लिए एक बड़ा फैसला था।
नीम करोली बाबा से गहरा जुड़ाव
अनुप्रिया ने बताया कि नीम करोली बाबा के विचारों और उनके जीवन से वह काफी प्रभावित हुईं। उनका मानना है कि बाबा का प्रभाव भारत के साथ-साथ विदेशों में भी बड़ी संख्या में लोगों पर रहा है। उन्होंने दुनिया की कई चर्चित हस्तियों के बाबा से प्रभावित होने का भी जिक्र किया।
अनुप्रिया का मानना है कि बाबा की लोकप्रियता काफी व्यापक होने के बावजूद आज भी बहुत से लोग उनके जीवन, विचारों और आध्यात्मिक विरासत के बारे में ज्यादा नहीं जानते। इसी वजह से वह चाहती थीं कि फिल्म के जरिए ज्यादा से ज्यादा लोगों तक उनकी कहानी पहुंचे और लोग उनके जीवन के बारे में जानने के लिए प्रेरित हों।
फिल्म से पहले करीब एक साल की रिसर्च
अनुप्रिया ने बताया कि फिल्म से जुड़ने से पहले इस विषय को समझने के लिए करीब एक साल तक रिसर्च की गई। नीम करोली बाबा के जीवन, उनके विचारों और उनसे जुड़े अनुभवों को समझने के बाद फिल्म की कहानी को लेकर उनका विश्वास और मजबूत हुआ।
उनके लिए यह प्रोजेक्ट सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं था। वह इसे एक ऐसी कहानी के तौर पर देखती हैं, जिसके जरिए दर्शकों को आध्यात्मिकता और बाबा की विरासत से परिचित कराया जा सके।
फिल्म की सफलता को अनुप्रिया बाबा का आशीर्वाद और चमत्कार मानती हैं। उनका कहना है कि जिस प्रोजेक्ट में उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा लगाया, उसका दर्शकों तक पहुंचना उनके लिए बेहद खास अनुभव है। कम उम्र में इतना बड़ा जोखिम उठाने वाली अनुप्रिया की कहानी अब फिल्म की सफलता के साथ खुद भी चर्चा का हिस्सा बन गई है।

