कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा जल्द ही पाठकों के बीच आने वाली है। उनकी 544 पन्नों की किताब ‘Belonging: A Journey of Love’ 10 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी। किताब के आधिकारिक प्रकाशन से पहले इसके प्रकाशक की ओर से सोनिया गांधी का एक बयान जारी किया गया है, जिसमें उन्होंने बताया कि अपने जीवन की कहानी को शब्दों में पिरोना उनके लिए आसान अनुभव नहीं रहा।
न्यूयॉर्क में प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ की ओर से जारी बयान में सोनिया गांधी ने कहा कि अपने जीवन के बारे में लिखने के लिए उन्हें उन भावनाओं, अनुभवों और यादों को सामने लाना पड़ा, जिन्हें उन्होंने वर्षों से अपने दिल में संभालकर रखा था। उन्होंने अपने जीवन में आए दुख और अपनों को खोने के अनुभव को भी अपनी राजनीतिक यात्रा से जोड़ा।
‘अपने जीवन के बारे में लिखना आसान नहीं था’
सोनिया गांधी ने कहा कि लंबे समय तक उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से दूर रखा। उनके मुताबिक, जिंदगी में आए गहरे दुख और अपनों को खोने का दर्द ही उन्हें राजनीति की दुनिया में लेकर आया। उन्होंने कहा कि आत्मकथा लिखने का मतलब उन पलों और अनुभवों को साझा करना था, जिन्हें उन्होंने हमेशा अपने तक सीमित रखा।
उन्होंने उम्मीद जताई कि उनकी यह किताब उनके जीवन में आए सुख, दुख और गहरी निराशाओं से भरी भावनात्मक यात्रा को समझने का एक माध्यम बनेगी। सोनिया गांधी ने यह भी कहा कि उनके परिवार के बारे में काफी कुछ लिखा गया है, लेकिन उनके फैसलों के पीछे छिपी भावनाओं और मानवीय पहलुओं के बारे में बहुत कम जानकारी सामने आई है।
पहली एक लाख प्रतियां छापने की तैयारी
प्रकाशक अल्फ्रेड ए. नॉफ के मुताबिक, ‘Belonging: A Journey of Love’ का हार्डकवर और ई-बुक संस्करण 10 नवंबर को जारी किया जाएगा। इसके अलावा किताब का ऑडियो संस्करण भी उपलब्ध कराया जाएगा। प्रकाशक ने किताब की शुरुआती एक लाख प्रतियां प्रकाशित करने की घोषणा की है।
किताब के प्रकाशन को सोनिया गांधी के सार्वजनिक जीवन और निजी अनुभवों को समझने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आत्मकथा में उनके जीवन के उन पहलुओं को भी जगह दी गई है, जिनसे आम तौर पर लोग कम परिचित रहे हैं।
इटली के बचपन से भारत तक का सफर
सोनिया गांधी की आत्मकथा में उनके इटली में बिताए बचपन से लेकर भारत में उनके जीवन तक की कहानी बताई गई है। इसमें राजीव गांधी के साथ उनके विवाह, गांधी परिवार में उनके प्रवेश और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की बहू बनने के अनुभवों का भी जिक्र है।
सोनिया गांधी ने अपनी जिंदगी को इटली के एक छोटे शहर में बिताए सरल बचपन से लेकर भारत में बिताए जटिल और महत्वपूर्ण वर्षों तक की यात्रा बताया है। उन्होंने कहा कि राजनीति से दूरी बनाने के बाद जब उन्होंने अपने पूरे जीवन को पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें महसूस हुआ कि उनकी जिंदगी के अलग-अलग पड़ावों को जोड़ने वाली सबसे महत्वपूर्ण कड़ी प्रेम और निष्ठा रही है।
ऐसे में सोनिया गांधी की यह आत्मकथा उनके निजी जीवन, परिवार और राजनीतिक सफर के कई अनदेखे पहलुओं को सामने ला सकती है। 10 नवंबर को किताब के प्रकाशित होने के बाद पाठकों को उनकी जिंदगी को उनके अपने नजरिए से समझने का मौका मिलेगा।

