गया: बिहार के गया जिले के टिकारी प्रखंड स्थित मध्य विद्यालय, सिमुआरा में मिड-डे मील और स्कूल की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर छात्रों के प्रदर्शन का असर अब प्रशासनिक कार्रवाई के रूप में दिखाई देने लगा है। छात्रों की शिकायतों के बाद एसडीएम कुंदन प्रवीण ने विद्यालय का औचक निरीक्षण किया और बच्चों के साथ जमीन पर बैठकर मिड-डे मील खाया। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वाद और स्वच्छता की स्वयं जांच की तथा स्कूल की अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब पिछले मंगलवार को करीब 40 से अधिक छात्र-छात्राओं ने एसडीओ कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया था। छात्रों ने मिड-डे मील की खराब गुणवत्ता, शौचालयों की जर्जर स्थिति, पेयजल की कमी और स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को लेकर विरोध जताया था। छात्रों का यह प्रदर्शन स्थानीय प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहा।
शुक्रवार सुबह एसडीएम कुंदन प्रवीण विद्यालय पहुंचे। उनके साथ बीडीओ, पंचायत के मुखिया और शिक्षा विभाग के अधिकारी भी मौजूद थे। निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने बच्चों के साथ बैठकर वही भोजन किया जो छात्रों को मिड-डे मील के तहत परोसा गया था। इसके बाद उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और पोषण संबंधी पहलुओं पर अधिकारियों से जानकारी ली।
निरीक्षण के दौरान कई छात्रों ने एसडीएम को बताया कि प्रदर्शन के बाद मिड-डे मील की गुणवत्ता में पहले की तुलना में सुधार हुआ है। इस पर एसडीएम ने कहा कि बच्चों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है और इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
एसडीएम ने विद्यालय परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया और शौचालय, पेयजल, साफ-सफाई, रसोईघर और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने प्रधानाध्यापक और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यालय में मौजूद सभी कमियों को शनिवार तक दूर किया जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
विद्यालय के छात्रों और अभिभावकों ने प्रशासन की त्वरित कार्रवाई का स्वागत किया। उनका कहना है कि यदि मिड-डे मील की गुणवत्ता और स्कूल की बुनियादी सुविधाओं में स्थायी सुधार होता है, तो बच्चों की पढ़ाई और उपस्थिति दोनों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। स्थानीय लोगों ने भी माना कि छात्रों ने अपनी समस्याओं को शांतिपूर्ण तरीके से उठाकर एक महत्वपूर्ण उदाहरण पेश किया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मिड-डे मील योजना का उद्देश्य केवल भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि बच्चों के पोषण स्तर और स्कूल में नियमित उपस्थिति को बढ़ाना भी है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता और स्कूल की मूलभूत सुविधाओं पर नियमित निगरानी बेहद जरूरी है।
गया के सिमुआरा विद्यालय का यह मामला इस बात का संकेत है कि छात्रों की सामूहिक आवाज प्रशासन को सक्रिय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अब देखना होगा कि प्रशासन द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद विद्यालय की व्यवस्थाओं में कितना सुधार होता है और छात्रों की शिकायतों का स्थायी समाधान किस हद तक संभव हो पाता है।

