दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे सामने आए, जिन पर अब दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शन के दौरान किसी भी महिला, बच्ची या अन्य प्रदर्शनकारी पर हमला नहीं किया गया। साथ ही, 40 से 50 लोगों के घायल होने और सिर फूटने के दावों को भी पूरी तरह गलत और भ्रामक बताया गया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि के साथ मारपीट की गई, उनके बाल खींचे गए और एक 12 वर्षीय लड़की के सिर पर गंभीर चोट पहुंची। इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि 40 से 50 प्रदर्शनकारियों के सिर फूट गए। अपनी पोस्ट में उन्होंने दिल्ली पुलिस को टैग करते हुए पूरे मामले पर जवाब मांगा।
इन आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही यह जानकारी पूरी तरह भ्रामक और असत्य है। पुलिस ने एक्स पर जारी बयान में कहा कि किसी भी महिला या 12 वर्षीय लड़की पर हमला नहीं हुआ है और न ही बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के घायल होने की कोई घटना सामने आई है। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे बिना पुष्टि के किसी भी जानकारी को साझा न करें और अफवाहों से बचें।
इस बीच, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल को खाली करा दिया है। वहीं, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने CJP के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की। हालांकि, बैठक के बाद सरकार की ओर से किसी भी मांग पर तत्काल सहमति या आश्वासन नहीं दिया गया।
CJP ने सरकार के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग, सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर पर वापस लाने की अनुमति, और नीट परीक्षा के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजनों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग शामिल है।
इसी दौरान CJP नेता अभिजीत दीपके ने अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी। पार्टी का दावा है कि सरकार ने बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल को बुलाया, जिसके बाद यह फैसला लिया गया। हालांकि, आंदोलन को लेकर आगे की रणनीति पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
फिलहाल, पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक और सामाजिक हलकों की नजर बनी हुई है। जहां एक ओर प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाए हुए हैं, वहीं दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे झूठे दावों से बचना जरूरी है। आने वाले दिनों में सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच होने वाली आगे की बातचीत से आंदोलन की दिशा तय होने की संभावना है।

