पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा तेज हुए सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार पर दिखाई देने लगा है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने की आशंका के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 83 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट यानी WTI भी 78 डॉलर प्रति बैरल के पार कारोबार करता दिखाई दिया। हालिया उछाल के बाद कच्चे तेल की कीमतें करीब एक महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
एक दिन में नौ प्रतिशत से ज्यादा उछला तेल
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड 7.29 डॉलर यानी नौ प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ 83.30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। वहीं, WTI क्रूड की कीमत 6.73 डॉलर बढ़कर 78.14 डॉलर प्रति बैरल हो गई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में यह तेजी वास्तविक आपूर्ति में कमी के साथ भविष्य में सप्लाई बाधित होने की आशंका से जुड़े जोखिम प्रीमियम के कारण आई है।
इसका सबसे बड़ा कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ता तनाव है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है और दुनिया के तेल एवं एलएनजी व्यापार का करीब पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर एशिया और यूरोप सहित दुनिया के कई हिस्सों में ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।
होर्मुज से गुजरने वाले कार्गो पर 20% शुल्क का प्रस्ताव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी जहाजों के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी फिर लागू करने की घोषणा की है। इसके साथ ही अमेरिका द्वारा सुरक्षित आवाजाही उपलब्ध कराने के बदले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अन्य कार्गो पर 20 प्रतिशत शुल्क वसूलने का प्रस्ताव रखा गया है।
इस घोषणा से समुद्री परिवहन और बीमा लागत बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है। हालांकि, प्रस्तावित शुल्क को लागू करने के कानूनी आधार और भुगतान व्यवस्था को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून सामान्य रूप से ऐसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में निर्बाध आवाजाही का समर्थन करता है।
रूसी तेल खरीदारों पर प्रतिबंध की तैयारी
तेल बाजार की चिंता केवल पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है। ट्रंप प्रशासन ने उस प्रस्तावित अमेरिकी कानून का समर्थन किया है, जिसके तहत रूसी तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों या संस्थाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
अमेरिकी सांसदों के एक द्विदलीय समूह ने ट्रंप प्रशासन के साथ रूस संबंधी प्रतिबंध विधेयक पर सहमति बनने का दावा किया है। इसका उद्देश्य रूस के ऊर्जा ग्राहकों पर आर्थिक दबाव डालकर मॉस्को की आय सीमित करना है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून बनने की प्रक्रिया में है और इसके अंतिम प्रावधानों तथा लागू होने की तारीख की औपचारिक घोषणा बाकी है।
रूसी ऊर्जा आपूर्ति पर नए प्रतिबंध लागू होने से वैश्विक बाजार में उपलब्ध तेल की मात्रा घट सकती है। दूसरी ओर, होर्मुज में सैन्य गतिविधियां और जहाजों पर हमले सप्लाई संकट को और गंभीर बना सकते हैं। विश्लेषकों के मुताबिक, तनाव लंबा खिंचने या समुद्री यातायात में बड़ी रुकावट आने पर कच्चे तेल की कीमतों में आगे भी तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

