केंद्र सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने डिस्प्ले असेंबली, लिथियम-आयन सेल और इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल जैसे जरूरी इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले सामान पर लगने वाली बेसिक कस्टम ड्यूटी को हटा दिया है। इस कदम को भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग का ग्लोबल हब बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, लिथियम-आयन सेल बनाने में इस्तेमाल होने वाली कई मशीनों और उपकरणों को कस्टम ड्यूटी से छूट दी गई है। इनमें पाउडर ड्रायर, ऑटोमैटिक फीडिंग और ब्लेंडिंग सिस्टम, स्लरी ट्रांसफर सिस्टम, कैथोड और एनोड कोटिंग मशीन, हाई वैक्यूम पंप, वाइंडिंग मशीन, कटिंग मशीन, टेस्टिंग मशीन, ऑटो पैकिंग सिस्टम, स्टैकिंग मशीन और वेल्डिंग मशीन जैसे उपकरण शामिल हैं।
इसके साथ ही डिस्प्ले असेंबली और इंडक्टर कॉइल मॉड्यूल के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सामान पर भी अब बेसिक कस्टम ड्यूटी नहीं लगेगी। सरकार का मानना है कि इससे देश में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स का उत्पादन बढ़ेगा और कंपनियों को भारत में मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
यह फैसला प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI स्कीम को भी मजबूत करेगा। सरकार लंबे समय से मोबाइल फोन, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी, स्मार्टवॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। कस्टम ड्यूटी में छूट मिलने से कंपनियों की उत्पादन लागत कम हो सकती है, जिससे भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।
इस फैसले का एक बड़ा उद्देश्य विदेशी निर्भरता को कम करना भी है। अभी कई इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स और मशीनें विदेशों से आयात की जाती हैं। लेकिन सरकार की इस राहत के बाद कंपनियां देश में ही जरूरी कंपोनेंट्स के निर्माण पर ज्यादा ध्यान दे सकेंगी। इससे भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम मजबूत होगा और आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी बल मिलेगा।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, यह कस्टम ड्यूटी छूट 31 मार्च 2029 तक लागू रहेगी। यानी अगले कुछ वर्षों तक कंपनियों को भारत में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और उनसे जुड़े उपकरणों के निर्माण में टैक्स राहत मिलती रहेगी। इससे नए निवेश आने की संभावना भी बढ़ सकती है।
मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी और स्मार्टवॉच खरीदने वाले ग्राहकों के लिए भी यह फैसला अहम साबित हो सकता है। अगर कंपनियों की लागत कम होती है, तो आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस की कीमतों पर सकारात्मक असर देखने को मिल सकता है। हालांकि कीमतों में कमी तुरंत होगी या नहीं, यह कंपनियों की रणनीति, बाजार की मांग और उत्पादन लागत पर निर्भर करेगा।
कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनाने, निवेश बढ़ाने और घरेलू उत्पादन को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला माना जा रहा है।

