नई दिल्ली: पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की केंद्र सरकार की E20 नीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। मंगलवार, 30 जून 2026 को एथेनॉल सप्लाई और टेंडर से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 20 प्रतिशत एथेनॉल ब्लेंडिंग एक नीतिगत फैसला है। हालांकि, अलग-अलग उत्पादकों और तेल कंपनियों के लिए एथेनॉल की मात्रा मांग, उपलब्धता और अन्य परिचालन जरूरतों के आधार पर तय की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट ने एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 के मौजूदा आवंटन को लेकर अगले आदेश तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। इसका अर्थ यह है कि फिलहाल आवंटन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। अदालत का आदेश एथेनॉल की खरीद और आवंटन से जुड़े विवाद तक सीमित है। इसे E20 पेट्रोल नीति पर रोक के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा मामला
यह मामला भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी BPCL की ओर से दाखिल याचिका से जुड़ा है। BPCL ने कर्नाटक हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें सरकारी तेल विपणन कंपनियों से एक डिस्टिलरी की अधिक एथेनॉल आवंटित करने की मांग पर विचार करने को कहा गया था।
डिस्टिलरी ने सप्लाई ईयर 2025-26 के लिए करीब 9.26 करोड़ लीटर एथेनॉल उपलब्ध कराने की पेशकश की थी, लेकिन उसे लगभग 3.92 करोड़ लीटर की सप्लाई का आवंटन मिला। इसके बाद कंपनी ने आवंटन बढ़ाने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने तेल कंपनियों को उसके आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था।
BPCL की दलील है कि एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 के लिए आवंटन प्रक्रिया पहले ही पूरी हो चुकी है। किसी एक आपूर्तिकर्ता के मामले में इसे दोबारा खोलने से अन्य कंपनियां भी इसी तरह की मांग कर सकती हैं, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर एथेनॉल की सप्लाई और E20 कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है।
केंद्र ने मांगा ट्रांसफर याचिका दाखिल करने का समय
सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि एथेनॉल आवंटन से संबंधित कई मामले देश के विभिन्न हाईकोर्ट में लंबित हैं। उन्होंने कहा कि अलग-अलग अदालतों से अलग-अलग आदेश आने पर राष्ट्रीय नीति और सप्लाई व्यवस्था में परेशानी पैदा हो सकती है।
केंद्र सरकार ने इन मामलों को एक जगह स्थानांतरित कर संयुक्त रूप से सुनवाई कराने के लिए ट्रांसफर याचिका दाखिल करने की बात कही। सुप्रीम कोर्ट ने मामले में नोटिस जारी किया और पूछा कि BPCL ने कर्नाटक हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने अपील करने के बजाय सीधे शीर्ष अदालत का रुख क्यों किया।
‘प्रयोग’ वाले बयान पर दी गई सफाई
अटॉर्नी जनरल ने सुनवाई के दौरान एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को एक बड़ा प्रयोग बताते हुए कहा कि इसके व्यापक परिणाम अगले वर्ष तक अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। बाद में उन्होंने साफ किया कि इस बयान का मतलब पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने की नीति को वापस लेना या बदलना नहीं है।
सरकार ने एथेनॉल सप्लाई ईयर 2025-26 तक औसतन 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग हासिल करने का लक्ष्य तय किया था। अगस्त 2025 तक देश में औसत एथेनॉल ब्लेंडिंग 19.93 प्रतिशत तक पहुंच चुकी थी। सरकार का कहना है कि इस कार्यक्रम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करने, किसानों को अतिरिक्त बाजार देने और स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।
फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के सामने विवाद E20 पेट्रोल के फॉर्मूले को लेकर नहीं, बल्कि उत्पादकों के बीच एथेनॉल की सप्लाई और आवंटन प्रक्रिया से जुड़ा है। मामले की अगली सुनवाई तक मौजूदा आवंटन व्यवस्था बरकरार रहेगी।

