नई दिल्ली: गर्मियों का मौसम आते ही आम का जादू लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगता है। फलों का राजा कहे जाने वाले आम का स्वाद हर किसी को पसंद होता है, लेकिन भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे खाने के तरीके भी उतने ही खास और दिलचस्प हैं। कहीं आम को दूध और पोहा के साथ खाया जाता है तो कहीं दाल-चावल के साथ इसका स्वाद लिया जाता है। यही वजह है कि आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि भारतीय खानपान और संस्कृति का अहम हिस्सा बन चुका है।
ओडिशा में आम और पोहा का अनोखा मेल काफी लोकप्रिय है। यहां लोग पोहा को अच्छी तरह धोकर उसमें दूध और चीनी मिलाते हैं। इसके बाद कटे हुए मीठे आम डाले जाते हैं और ऊपर से ताजा कद्दूकस किया हुआ नारियल छिड़का जाता है। यह पारंपरिक व्यंजन स्वाद के साथ-साथ पोषण से भी भरपूर माना जाता है। गर्मियों की सुबह या शाम के नाश्ते में इसे बड़े चाव से खाया जाता है।
वहीं, गुजरात और महाराष्ट्र में आमरस और पूरी का संयोजन बेहद मशहूर है। आमरस बनाने के लिए अच्छी तरह पके और रसीले आमों का उपयोग किया जाता है। आम के गूदे को निकालकर उसमें हल्की मिठास और स्वाद के अनुसार मसाले मिलाए जाते हैं। इसके बाद इसे गर्मागर्म छोटी पूरियों के साथ परोसा जाता है। बोहरा समुदाय और महाराष्ट्रियन-गुजराती थाली में आमरस-पूरी की विशेष जगह है। हैदराबाद में भी इस व्यंजन का स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है।
पूर्वोत्तर भारत के राज्य असम में आम को एक अलग अंदाज में खाया जाता है। यहां कई परिवार गर्मियों में मसूर दाल, उबले हुए चावल और आलू के दलिया के साथ आम का सेवन करते हैं। खास तौर पर लंगड़ा आम का इस्तेमाल किया जाता है। दाल और चावल के सादे स्वाद के साथ आम की प्राकृतिक मिठास एक अनोखा संतुलन बनाती है, जो खाने का अनुभव और भी खास बना देती है।
इसके अलावा मीठा-खट्टा आम का सलाद भी लोगों की पसंदीदा डिश में शामिल है। हल्के पके हुए आम को छोटे टुकड़ों में काटकर उसमें नमक, बारीक कटी हरी मिर्च और कुछ मसाले मिलाए जाते हैं। यह सलाद स्वाद में चटपटा और ताजगी से भरपूर होता है। इसे नाचोस, चिप्स, क्रैकर्स या फिर मुख्य भोजन के साथ भी परोसा जा सकता है। कई लोग इसे डिप के रूप में भी इस्तेमाल करते हैं।
खानपान विशेषज्ञों के अनुसार आम न केवल स्वादिष्ट होता है बल्कि इसमें विटामिन ए, विटामिन सी, फाइबर और कई जरूरी एंटीऑक्सीडेंट भी पाए जाते हैं। यही कारण है कि इसे विभिन्न रूपों में खाने से शरीर को पोषण भी मिलता है और स्वाद का आनंद भी।
गर्मियों में आम के ये अलग-अलग व्यंजन यह साबित करते हैं कि भारत की खाद्य संस्कृति कितनी विविध और समृद्ध है। चाहे आमरस-पूरी हो, पोहा-दूध के साथ आम हो या फिर दाल-चावल के साथ इसका अनोखा मेल, हर क्षेत्र ने इस फल को अपने अंदाज में अपनाया है। यही वजह है कि आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि भारतीय स्वाद और परंपरा की पहचान बन चुका है।

