दुबई: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर गहरा गया है। कुवैत ने गुरुवार को दावा किया कि उस पर मिसाइल और ड्रोन के जरिए हमला किया गया है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम (सीजफायर) लागू होने के बावजूद क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां लगातार जारी हैं। कुवैत के इस दावे के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय हालात पर करीबी नजर बनाए हुए है।
कुवैत की सेना ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि देश के कुछ हिस्सों को निशाना बनाने की कोशिश की गई। हालांकि अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए यह स्पष्ट नहीं किया कि हमले का लक्ष्य कौन से स्थान थे और कितना नुकसान हुआ। घटना के कुछ घंटों बाद ईरान की ओर से भी क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई किए जाने की बात स्वीकार की गई, लेकिन हमले के स्थान और उसके उद्देश्य को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई।
कुवैत पहले भी रहा है निशाने पर
विशेषज्ञों का मानना है कि कुवैत की रणनीतिक स्थिति और अमेरिका के साथ उसके घनिष्ठ संबंध उसे क्षेत्रीय संघर्षों में संवेदनशील बनाते हैं। अतीत में भी ईरान समर्थित समूहों और क्षेत्र में सक्रिय सशस्त्र संगठनों द्वारा कुवैत को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आती रही हैं। यही कारण है कि मौजूदा हमले के दावे को गंभीरता से लिया जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ तनाव कम करने और क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के प्रयासों में जुटा हुआ है। हाल ही में ट्रंप ने दावा किया था कि दोनों देशों के बीच बातचीत में प्रगति हो रही है और युद्ध समाप्त करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले हैं। हालांकि जमीन पर हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का केंद्र
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव का सबसे बड़ा प्रभाव होर्मुज जलडमरूमध्य पर पड़ा है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।
रिपोर्टों के अनुसार, क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और सुरक्षा जोखिमों के कारण तेल परिवहन प्रभावित हुआ है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतों में तेज उछाल देखा गया है, जिससे कई देशों में ईंधन और परिवहन लागत बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।
अमेरिका और ईरान की अलग-अलग मांगें
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) कार्यक्रम पर सख्त नियंत्रण स्वीकार करे और परमाणु गतिविधियों को सीमित करे। वहीं ईरान की मांग है कि उस पर लगाए गए आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं और विदेशों में जमी उसकी संपत्तियां वापस की जाएं, ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके।
इन मुद्दों पर सहमति नहीं बनने के कारण वार्ता प्रक्रिया धीमी बनी हुई है। दोनों पक्ष सार्वजनिक रूप से बातचीत जारी रखने की बात कह रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में हो रहे हमले तनाव कम होने के संकेत नहीं देते।
ड्रोन हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला जारी
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, हाल ही में अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास खतरा पैदा कर रहे चार ड्रोन मार गिराए थे। इसके अलावा ईरान के बंदर अब्बास क्षेत्र में स्थित एक नियंत्रण केंद्र को भी निशाना बनाया गया, जहां से एक अन्य ड्रोन लॉन्च किए जाने की तैयारी थी।
दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। हालांकि दोनों पक्षों की ओर से जारी बयानों में कई जानकारियां स्पष्ट नहीं की गई हैं, जिससे क्षेत्र की वास्तविक स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
कुवैत पर कथित हमले के बाद पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ऐसे में दुनिया की नजर अब अमेरिका-ईरान वार्ता और खाड़ी क्षेत्र में होने वाले अगले घटनाक्रम पर टिकी हुई है।
