डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: चीन यात्रा के दौरान शी जिनपिंग से ईरान पर चर्चा, ‘डील या तबाही’ की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी हालिया चीन यात्रा के दौरान ईरान को लेकर एक बड़ा और सख्त बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ उनकी बातचीत में ईरान का मुद्दा प्रमुख रहा और दोनों नेताओं के बीच इस बात पर सहमति बनी कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाने चाहिए।
ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास अब केवल दो विकल्प बचे हैं—“समझौता (डील) या तबाही (destruction)”。 उन्होंने अपने बयान में यह भी कहा कि यदि ईरान ने परमाणु कार्यक्रम और युद्ध संबंधी गतिविधियों को नहीं रोका, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ट्रंप ने यह टिप्पणी फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अपनी चीन यात्रा के अंतिम दिन की।
शी जिनपिंग से बातचीत का दावा
डोनाल्ड ट्रंप के अनुसार, उन्होंने शी जिनपिंग के साथ ईरान को लेकर विस्तार से चर्चा की। ट्रंप ने दावा किया कि चीनी राष्ट्रपति भी इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। साथ ही, ट्रंप ने यह भी कहा कि जिनपिंग ने इस मुद्दे पर मध्यस्थता या सहयोग करने की इच्छा जताई है ताकि अमेरिका और ईरान के बीच कोई समझौता संभव हो सके।
ट्रंप के मुताबिक, चीन ने आश्वासन दिया है कि वह ईरान को युद्ध के लिए किसी प्रकार का सैन्य उपकरण उपलब्ध नहीं कराएगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भी माना जाता है कि चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक संबंध काफी मजबूत हैं।
ईरान पर कड़ा रुख
ईरान को लेकर अपने सख्त रुख को दोहराते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी स्थिति में ईरान को परमाणु शक्ति बनने नहीं देगा। उन्होंने कहा, “ईरान अब कमजोर स्थिति में है और अगर उसने समझौता नहीं किया तो उसे भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।”
ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सैन्य ताकत इतनी मजबूत है कि वह ईरान के खार्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकाने को कुछ ही मिनटों में नष्ट कर सकती है। उन्होंने कहा कि संभावित संघर्ष इराक और वियतनाम जैसे लंबे युद्धों की तरह नहीं होगा, बल्कि यह तेज और निर्णायक होगा।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता तनाव
ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में एक बार फिर हलचल पैदा कर दी है। ईरान, अमेरिका और चीन के बीच पहले से ही तनावपूर्ण संबंधों के बीच यह टिप्पणी कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वास्तव में चीन और अमेरिका ईरान मुद्दे पर किसी साझा रणनीति पर आते हैं, तो यह मध्य पूर्व की राजनीति को प्रभावित कर सकता है।
फिलहाल, इस बयान पर चीन या ईरान की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि इसका असर वैश्विक सुरक्षा और ऊर्जा बाजार दोनों पर पड़ सकता है।

