गर्मी का मौसम आते ही बाजारों में आम की बहार शुरू हो जाती है। आम को फलों का राजा कहा जाता है और इस मौसम में इसकी मांग सबसे ज्यादा बढ़ जाती है। लेकिन आम के साथ एक चिंता भी हर साल सामने आती है—क्या बाजार में बिक रहे आम प्राकृतिक तरीके से पके हैं या फिर उन्हें केमिकल और कार्बाइड से पकाया गया है? इसी मुद्दे से जुड़ा एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि नींबू की मदद से नकली या केमिकल से पके आम की पहचान की जा सकती है।
वायरल वीडियो में एक व्यक्ति लोगों को एक खास टेस्ट के बारे में बताता नजर आता है। वीडियो में कहा गया है कि सबसे पहले एक नींबू को बीच से काट लें और फिर उसे आम के ऊपरी हिस्से यानी सिरे पर रगड़ें। वीडियो में दावा किया गया है कि अगर आम का रंग बैंगनी हो जाए तो इसका मतलब है कि उसे Calcium Carbide से पकाया गया है और ऐसा आम स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। वहीं अगर रंग नहीं बदलता, तो आम को प्राकृतिक तरीके से पका हुआ बताया गया है।
हालांकि, वीडियो के डिस्क्रिप्शन में इस दावे को पूरी तरह गलत और वैज्ञानिक आधार से रहित बताया गया है। यह वीडियो Instagram पर “jyotiscookingchannel” नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। पोस्ट के कैप्शन में साफ लिखा गया है कि नींबू रगड़ने वाला यह टेस्ट वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं है और केवल रंग बदलने के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि आम कार्बाइड से पकाया गया है या नहीं।
डिस्क्रिप्शन में लोगों को सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके से पके आम की पहचान करने के कुछ अन्य तरीके बताए गए हैं। पोस्ट के अनुसार, प्राकृतिक रूप से पके आम का रंग पूरी तरह एक जैसा नहीं होता, बल्कि उसमें हल्का-फुल्का असमान रंग दिखाई देता है। इसके अलावा आम के डंठल यानी सिरे के पास से मीठी खुशबू आती है और दबाने पर वह थोड़ा मुलायम महसूस होता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक Calcium Carbide का इस्तेमाल फलों को जल्दी पकाने के लिए किया जाता है, लेकिन यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इससे सिरदर्द, चक्कर, पेट संबंधी समस्याएं और लंबे समय में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। भारत में खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत फलों को पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाया गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले हर दावे पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। कई बार ऐसे वीडियो बिना वैज्ञानिक प्रमाण के वायरल हो जाते हैं और लोग भ्रमित हो जाते हैं। किसी भी खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता जांचने के लिए सही जानकारी और प्रमाणित स्रोतों पर भरोसा करना जरूरी है।
इन दिनों सोशल मीडिया पर फूड से जुड़े कई घरेलू टेस्ट वायरल होते रहते हैं, लेकिन हर टेस्ट सही हो यह जरूरी नहीं। इसलिए आम खरीदते समय उसकी खुशबू, रंग, बनावट और विश्वसनीय विक्रेता पर ध्यान देना सबसे बेहतर तरीका माना जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि आम खाने से पहले उन्हें अच्छी तरह पानी से धोना चाहिए ताकि सतह पर मौजूद किसी भी रसायन या गंदगी को हटाया जा सके।

