West Bengal Politics: शुभेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, ममता बनर्जी की गैरमौजूदगी बनी चर्चा का विषय
पश्चिम बंगाल की राजनीति में शनिवार का दिन ऐतिहासिक साबित हुआ, जब भाजपा नेता Suvendu Adhikari ने कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इसके साथ ही राज्य में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत वाली सरकार अस्तित्व में आ गई। हालांकि, इस भव्य शपथ ग्रहण समारोह से ज्यादा चर्चा पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की गैरमौजूदगी को लेकर रही।
बंगाल में पहली बार भाजपा की सरकार
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 294 सदस्यीय विधानसभा में 207 सीटों पर जीत दर्ज की। दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस और एजेयूएफ को 2-2 सीटें मिलीं, जबकि सीपीआईएम और एआईएसएफ के खाते में एक-एक सीट आई।
इस जीत के साथ बंगाल में लंबे समय बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और भाजपा ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम राज्य की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह में जुटे बड़े नेता
कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भाजपा के कई वरिष्ठ नेता, केंद्रीय मंत्री और पार्टी कार्यकर्ता मौजूद रहे। समारोह के दौरान शुभेंदु अधिकारी ने राज्य के विकास, कानून व्यवस्था और सुशासन को प्राथमिकता देने की बात कही।
शपथ लेने के बाद उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल में “मैं नहीं, हम” की सरकार चलेगी और सभी वर्गों को साथ लेकर राज्य को आगे बढ़ाया जाएगा।
ममता बनर्जी को भेजा गया था निमंत्रण
राजनीतिक हलकों में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की रही कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समारोह में शामिल नहीं हुईं। जानकारी के मुताबिक, प्रोटोकॉल के तहत उन्हें औपचारिक निमंत्रण भेजा गया था।
हालांकि, उन्होंने समारोह में हिस्सा नहीं लिया। इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में अलग-अलग तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। माना जा रहा था कि लोकतांत्रिक परंपरा निभाते हुए ममता बनर्जी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकती थीं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
टीएमसी की ओर से भी इस विषय पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
हार स्वीकारने को लेकर भी चर्चा
चुनाव परिणाम आने के बाद से ही ममता बनर्जी के रवैये को लेकर चर्चा जारी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अब तक अपनी हार को सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया है। इसके अलावा उन्होंने राजभवन जाकर मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा भी नहीं दिया था।
बताया जा रहा है कि राज्यपाल द्वारा 7 मई को उनकी सरकार को बर्खास्त किए जाने के बाद नई सरकार के गठन का रास्ता साफ हुआ। इसके बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी को नेता चुना गया और आज उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
शुभेंदु अधिकारी के सामने बड़ी चुनौतियां
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता संभालते ही शुभेंदु अधिकारी के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। इनमें कानून व्यवस्था में सुधार, महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार पर रोक, सिंडिकेट सिस्टम को खत्म करना और बांग्लादेश सीमा से होने वाली अवैध घुसपैठ पर नियंत्रण प्रमुख मुद्दे हैं।
इसके अलावा भाजपा सरकार को राज्य में प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और निवेश आकर्षित करने पर भी फोकस करना होगा।
बंगाल की राजनीति में नए दौर की शुरुआत
पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार बनने को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद अहम माना जा रहा है। लंबे समय तक वामपंथ और फिर तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव वाले राज्य में भाजपा की यह जीत एक बड़े राजनीतिक बदलाव के तौर पर देखी जा रही है।
अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई में नई सरकार राज्य की जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरती है।

