99 साल के पूर्व मंत्री Dr. H. V. Hande ने डाला वोट, PM मोदी ने बताया युवाओं के लिए प्रेरणा
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के दौरान एक प्रेरणादायक दृश्य सामने आया, जब पूर्व मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन (MGR) की सरकार में दो बार स्वास्थ्य मंत्री रह चुके डॉ. एच. वी. हांडे (Dr. H. V. Hande) 99 वर्ष की उम्र में मतदान करने पहुंचे। उनकी इस सक्रियता की न केवल सोशल मीडिया पर चर्चा हो रही है, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उनकी सराहना की है।
99 साल की उम्र में लोकतंत्र के प्रति जिम्मेदारी निभाई
गुरुवार को तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान हो रहा है, जहां बड़ी संख्या में मतदाता अपने अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। इसी बीच डॉ. हांडे भी पोलिंग बूथ पहुंचे और अपना वोट डाला। वोट डालने के बाद उन्होंने अपनी स्याही लगी उंगली की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (Twitter) पर साझा की।
अपने पोस्ट में उन्होंने लिखा कि 99 वर्ष की उम्र में भी उन्होंने अपने देश के लोकतंत्र में भाग लिया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पहली बार 1946 में मेडिकल छात्र के रूप में मतदान किया था। उनके अनुसार, “मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है और हर वोट महत्वपूर्ण है।”
पीएम मोदी ने की सराहना
डॉ. हांडे के इस पोस्ट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने उनके पोस्ट को रीपोस्ट करते हुए लिखा, “एक बहुत ही महत्वपूर्ण संदेश! मुझे उम्मीद है कि ज्यादा से ज्यादा युवा मतदान करेंगे और हमारे लोकतंत्र को मजबूत करेंगे।” पीएम मोदी ने डॉ. हांडे को युवाओं के लिए प्रेरणा बताया और उनसे सीख लेने की अपील की।
MGR सरकार में रहे थे मंत्री
डॉ. एच. वी. हांडे तमिलनाडु की राजनीति और चिकित्सा क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित नाम रहे हैं। वे पूर्व मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन की सरकार में दो बार स्वास्थ्य मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा उन्हें भारत के सर्वोच्च चिकित्सा सम्मान “डॉ. बी.सी. रॉय अवॉर्ड” से भी सम्मानित किया जा चुका है।
वे केवल एक राजनेता ही नहीं बल्कि एक विद्वान भी हैं, जिन्होंने “कंब रामायणम्” का अंग्रेजी गद्य में अनुवाद किया है। उनके लंबे सार्वजनिक जीवन और समाज सेवा के कार्यों ने उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बना दिया है।
लोकतंत्र के लिए संदेश
99 वर्ष की उम्र में मतदान करके डॉ. हांडे ने यह संदेश दिया है कि लोकतंत्र में भागीदारी किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। उनका यह कदम खासकर युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा के रूप में देखा जा रहा है, जो मतदान को अपनी जिम्मेदारी समझने का संदेश देता है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया है कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है, चाहे वह किसी भी उम्र का हो।

