नागपुर में एक एनजीओ से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सामाजिक संगठनों की कार्यप्रणाली और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। शहर में काम करने वाली कई युवतियों ने एक काजी पर यौन शोषण, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी की पहचान रियाज काजी के रूप में हुई है, जो “फिक्र फाउंडेशन” और “यूनिवर्सल मल्टीपरपज सोसायटी” नामक एनजीओ से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि वह इस संस्था के माध्यम से काम करने वाली युवतियों पर न केवल मानसिक दबाव बनाता था बल्कि उनकी निजी जिंदगी में भी दखल देता था। अब तक चार युवतियों ने आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई है, जबकि पुलिस को आशंका है कि पीड़ितों की संख्या इससे अधिक हो सकती है।
पीड़ित युवतियों का कहना है कि पिछले करीब एक साल से उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। उनके मुताबिक, आरोपी उन्हें धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने के लिए मजबूर करता था। उनसे नमाज पढ़ने, रोजे रखने और विशेष धार्मिक अभिवादन अपनाने का दबाव बनाया जाता था। जब उन्होंने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उन्हें नौकरी से निकालने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
इतना ही नहीं, युवतियों ने यह भी आरोप लगाया है कि आरोपी ने उनकी निजी जानकारी का दुरुपयोग किया। सोशल मीडिया पर उनकी फर्जी आईडी बनाकर उन पर नजर रखी जाती थी। यह भी आरोप है कि आरोपी उनकी व्यक्तिगत गतिविधियों पर नजर रखता था और उन्हें ब्लैकमेल करने की कोशिश करता था। इन परिस्थितियों से परेशान होकर कई युवतियों ने नौकरी छोड़ दी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मनकापुर पुलिस थाने के अधिकारियों के अनुसार, आरोपी के खिलाफ यौन शोषण, धमकी और आईटी एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। उसे अदालत में पेश किया गया, जहां से 23 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
पुलिस अब आरोपी के नेटवर्क और उसकी संस्था से जुड़े अन्य लोगों की भी जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संस्था को आर्थिक सहायता कहां से मिल रही थी और उसका इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा था। अधिकारियों का कहना है कि यदि इस मामले में और भी पीड़ित सामने आते हैं तो उनकी शिकायतों को भी गंभीरता से लिया जाएगा।
पुलिस ने अन्य संभावित पीड़ितों से आगे आने की अपील की है और भरोसा दिलाया है कि उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। यह मामला न केवल महिलाओं की सुरक्षा बल्कि एनजीओ जैसे संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़ा करता है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है।

