16 Apr 2026, Thu

तमिलनाडु में सीएम स्टालिन ने डीएमके सांसदों की बुलाई इमर्जेंसी बैठक, जानिए क्या है खास वजह

परिसीमन विवाद पर गरमाई सियासत, सीएम स्टालिन ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी

M. K. Stalin ने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री ने पार्टी सांसदों की आपात बैठक बुलाकर साफ संकेत दिए हैं कि अगर राज्य के हितों के साथ समझौता किया गया, तो व्यापक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। इस मुद्दे ने राष्ट्रीय राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, खासकर दक्षिण और उत्तर भारत के बीच प्रतिनिधित्व के संतुलन को लेकर।

चेन्नई में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने सांसदों को संसद में राज्य का पक्ष मजबूती से रखने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य रूप से प्रस्तावित परिसीमन के संभावित प्रभावों पर चर्चा हुई, जिसमें लोकसभा सीटों के पुनर्वितरण और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में बदलाव जैसे मुद्दे शामिल थे। स्टालिन ने स्पष्ट किया कि यह केवल राजनीतिक मामला नहीं, बल्कि राज्य के अधिकारों और भविष्य से जुड़ा गंभीर विषय है।

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर 850 करने की योजना है। इसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए प्रस्तावित हैं। हालांकि, दक्षिणी राज्यों का आरोप है कि यह प्रस्ताव जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्वितरण करेगा, जिससे उन राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है जिन्होंने वर्षों तक जनसंख्या नियंत्रण के उपायों का पालन किया है।

स्टालिन ने इस मुद्दे पर अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर भी आवाज उठाई है। उनका कहना है कि प्रस्तावित संविधान संशोधन (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 निष्पक्ष नहीं है और इससे दक्षिण भारत के राज्यों के साथ अन्याय हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार राज्यों से पर्याप्त परामर्श किए बिना इस संशोधन को लागू करने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री ने केंद्र पर ‘जबरदस्ती’ निर्णय थोपने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह संघीय ढांचे की भावना के खिलाफ है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तमिलनाडु के हितों को नजरअंदाज किया गया, तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। स्टालिन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब देश के कई राज्यों में चुनावी माहौल बना हुआ है।

इस बीच, Revanth Reddy ने भी लोकसभा सीटों में वृद्धि को आनुपातिक आधार पर लागू करने की मांग की है। उनका मानना है कि सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संतुलन बना रहे।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि परिसीमन का यह मुद्दा आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन सकता है। यह केवल सीटों के बंटवारे का मामला नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय संतुलन, राजनीतिक शक्ति और नीतिगत निर्णयों पर भी गहरा असर पड़ेगा।

कुल मिलाकर, परिसीमन को लेकर उठी यह बहस आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है। तमिलनाडु समेत कई राज्यों की चिंताओं को देखते हुए यह स्पष्ट है कि केंद्र सरकार के लिए इस मुद्दे पर सहमति बनाना आसान नहीं होगा।

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