10 Apr 2026, Fri

क्या फोन बन रहा है स्ट्रेस का कारण? एक्सपर्ट से जानें 24 घंटे बिना फोन के रहने से क्या असर होगा?

आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल अब मानसिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि फोन खुद समस्या नहीं है, बल्कि उसका अत्यधिक उपयोग तनाव और चिंता का कारण बन सकता है। इसलिए समय-समय पर डिजिटल ब्रेक लेना बेहद जरूरी हो गया है।

दिल्ली स्थित PSRI Hospital की साइकोलॉजिस्ट और काउंसलर Arpita Kohli का कहना है कि लगातार फोन का इस्तेमाल हमारे दिमाग को हमेशा एक्टिव और अलर्ट मोड में रखता है। बार-बार आने वाले नोटिफिकेशन, सोशल मीडिया पर लगातार स्क्रॉल करना और हर समय उपलब्ध रहने का दबाव मानसिक थकान को बढ़ाता है, जिससे तनाव और चिड़चिड़ापन पैदा हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, आज के समय में कई लोग बिना फोन के कुछ समय भी नहीं रह पाते। यह आदत धीरे-धीरे एक निर्भरता में बदल जाती है, जिससे व्यक्ति को बार-बार फोन चेक करने की इच्छा होती है। जब फोन पास नहीं होता, तो “कुछ जरूरी मिस हो रहा है” जैसा एहसास होता है, जिसे “FOMO” (Fear of Missing Out) कहा जाता है। यह मानसिक दबाव को और बढ़ा देता है।

फोन का अधिक इस्तेमाल नींद पर भी बुरा असर डालता है। स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी (Blue Light) हमारे स्लीप साइकल को प्रभावित करती है, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती। लगातार फोन चलाने से दिमाग को आराम नहीं मिल पाता, जिससे व्यक्ति दिनभर थका-थका और तनावग्रस्त महसूस कर सकता है।

क्या होता है अगर 24 घंटे फोन से दूरी बनाई जाए?
अगर कोई व्यक्ति 24 घंटे के लिए फोन का इस्तेमाल नहीं करता, तो शुरुआत में उसे असहजता महसूस हो सकती है। बार-बार फोन देखने की आदत के कारण खालीपन या हल्की बेचैनी हो सकती है। यह एक सामान्य मानसिक प्रतिक्रिया है, क्योंकि दिमाग इस आदत का आदी हो चुका होता है।

हालांकि, कुछ समय बाद इसके कई सकारात्मक प्रभाव देखने को मिलते हैं। डिजिटल ब्रेक लेने से दिमाग को आराम मिलता है और एकाग्रता बढ़ती है। व्यक्ति खुद को मानसिक रूप से ज्यादा शांत और हल्का महसूस करता है। इसके साथ ही मूड में भी सुधार आता है और तनाव कम होने लगता है।

फोन से दूरी बनाने का एक बड़ा फायदा यह भी है कि नींद की गुणवत्ता बेहतर होती है। बिना स्क्रीन के समय बिताने से शरीर का प्राकृतिक स्लीप साइकिल संतुलित रहता है। इससे व्यक्ति सुबह ज्यादा तरोताजा महसूस करता है और दिनभर एनर्जी बनी रहती है।

इसके अलावा, जब व्यक्ति फोन से दूर होता है, तो वह अपने आसपास के लोगों और वास्तविक जीवन पर ज्यादा ध्यान देता है। इससे रिश्तों में सुधार आता है और सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत होता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि 24 घंटे बिना फोन के रहना कोई स्थायी समाधान नहीं है, लेकिन यह अपनी आदतों को समझने और स्क्रीन टाइम को नियंत्रित करने का एक अच्छा तरीका जरूर है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि आप फोन पर कितने निर्भर हैं और आपको अपनी दिनचर्या में कितना संतुलन लाने की जरूरत है।

अंत में, यह कहा जा सकता है कि स्मार्टफोन का सीमित और समझदारी से उपयोग हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहतर है। समय-समय पर डिजिटल ब्रेक लेना न सिर्फ तनाव को कम करता है, बल्कि हमें एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जीने में भी मदद करता है।

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