10 Apr 2026, Fri

हम तो शांति और युद्धविराम ही चाहते हैं’, सीजफायर पर ट्रंप ने लिया नाम, चीन का आया पहला बयान

अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सीजफायर को लेकर वैश्विक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने इस युद्धविराम का श्रेय चीन को भी दिया है। ट्रंप के इस बयान के बाद अब चीन की ओर से पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उसने शांति और कूटनीति की अपनी पुरानी नीति को दोहराया है।

चीन ने स्पष्ट किया है कि वह हमेशा से ही शांति और संघर्ष विराम का समर्थक रहा है। बीजिंग में चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता Mao Ning ने कहा कि चीन ने इस सीजफायर का स्वागत किया है और वह लगातार बातचीत और शांति वार्ता की वकालत करता रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चीन की ओर से किसी भी प्रत्यक्ष वार्ता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिसके कारण इस समझौते को सीधे तौर पर चीन से जोड़ना उचित नहीं होगा।

माओ निंग ने कहा कि चीन शांति प्रक्रिया में “रचनात्मक भूमिका” निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने पाकिस्तान और अन्य देशों के प्रयासों की भी सराहना की, जिन्होंने इस संघर्ष को खत्म करने में योगदान दिया है। इसके साथ ही चीन ने यह भी संकेत दिया कि वह अपने स्तर पर शांति स्थापित करने के लिए प्रयास करता रहेगा।

चीन और पाकिस्तान ने हाल ही में मध्य पूर्व में शांति बहाल करने के लिए एक पांच सूत्री प्रस्ताव पर सहमति जताई थी। इस प्रस्ताव में तत्काल संघर्ष विराम, शांति वार्ता की शुरुआत, नागरिक और गैर-सैन्य लक्ष्यों की सुरक्षा, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सुरक्षित नौवहन और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का पालन शामिल है। चीन का मानना है कि इस तरह के कदम क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने में मदद कर सकते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस सीजफायर से चीन को भी रणनीतिक लाभ हो सकता है। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और ईरानी तेल का प्रमुख खरीदार है। यदि युद्ध लंबा चलता, तो तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता था, जिससे चीन की ऊर्जा जरूरतों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता। इसलिए सीजफायर और होर्मुज जलमार्ग का सामान्य संचालन चीन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान से मिलने वाला कच्चा तेल चीन को अक्सर रियायती दरों पर मिलता है। युद्ध और तनाव की स्थिति में तेल की आपूर्ति बाधित होने से चीन की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता था। यही कारण है कि चीन इस क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने में रुचि रखता है।

गौरतलब है कि इससे पहले भी चीन ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कुछ समय पहले सऊदी अरब और ईरान के बीच संबंध सुधारने में भी चीन ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। ऐसे में इस बार भी चीन खुद को एक ऐसे देश के रूप में पेश कर रहा है जो वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए काम करता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका-ईरान सीजफायर के बाद चीन की प्रतिक्रिया यह दर्शाती है कि वह इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के पक्ष में है। हालांकि, यह भी स्पष्ट है कि इस समझौते में चीन की भूमिका को लेकर अलग-अलग दावे सामने आ रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह सीजफायर स्थायी शांति की ओर बढ़ता है या केवल एक अस्थायी विराम साबित होता है।

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