होर्मुज संकट के बीच अमेरिका का बड़ा फैसला, ईरानी तेल पर अस्थायी राहत; वैश्विक बाजार को राहत देने की कोशिश
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। ईरान द्वारा इस अहम समुद्री मार्ग में तेल टैंकरों की आवाजाही बाधित किए जाने के बाद अमेरिका को बड़ा कदम उठाना पड़ा है। अमेरिकी प्रशासन ने वैश्विक तेल संकट को कम करने के लिए ईरानी तेल पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने का ऐलान किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में यह फैसला ऐसे समय लिया गया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले और नाकाबंदी की वजह से तेल की आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान इस क्षेत्र से गुजरने वाले टैंकरों को निशाना बना रहा है, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के अनुसार, यह राहत केवल अस्थायी और सीमित अवधि के लिए है। इस फैसले के तहत समुद्र में पहले से फंसे करीब 140 मिलियन बैरल ईरानी तेल को वैश्विक बाजार में लाने की अनुमति दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह अनुमति केवल पहले से ट्रांजिट में मौजूद तेल पर लागू होगी और नए उत्पादन या खरीद की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इस संकट का सबसे बड़ा असर वैश्विक तेल कीमतों पर देखने को मिला है। युद्ध से पहले जहां ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, वहीं अब यह बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। इसके चलते दुनिया भर में ईंधन महंगा हो गया है और महंगाई का दबाव बढ़ गया है। अमेरिका में भी पेट्रोल की कीमतें 3 डॉलर प्रति गैलन से बढ़कर लगभग 3.99 डॉलर तक पहुंच चुकी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की मजबूरी भी है और रणनीति भी। एक तरफ वह तेल की बढ़ती कीमतों को काबू में लाना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ वह ईरान पर दबाव बनाए रखने की नीति से पीछे हटना नहीं चाहता। अमेरिका का कहना है कि वह ईरान की आय तक उसकी पहुंच को सीमित रखेगा और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली में उसकी भागीदारी पर सख्ती जारी रखेगा।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका ने होर्मुज में हालात संभालने के लिए नाटो देशों से भी मदद मांगी थी, लेकिन किसी भी देश ने सैन्य हस्तक्षेप के लिए सहमति नहीं दी। इसके बाद यह आर्थिक कदम उठाया गया।
डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका अपने सैन्य अभियानों को समाप्त करने पर विचार कर रहा है, हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि वह अभी किसी औपचारिक युद्धविराम के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि अमेरिका अपने रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के करीब है।
इस बीच, ईरान ने भी यह संकेत दिया है कि वह अपनी रणनीति में बदलाव कर रहा है और क्षेत्र में अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए नए कदम उठा सकता है। इससे आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
कुल मिलाकर, होर्मुज संकट ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला दिया है और अमेरिका का यह फैसला फिलहाल राहत देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, यह देखना बाकी है कि यह अस्थायी समाधान लंबे समय तक कितनी स्थिरता ला पाता है।

