14 May 2026, Thu

6 फुट 3 इंच लंबा स्टारकिड, नहीं बनना चाहता एक्टर-डायरेक्टर, ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतना है लक्ष्य, छोड़ा भारत

फिल्मी दुनिया से दूर खेलों में नाम कमाने की चाह: आर माधवन के बेटे वेदांत का ओलंपिक सपना

बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाने वाले R. Madhavan के बेटे Vedaant Madhavan इन दिनों चर्चा में हैं, लेकिन वजह फिल्मी दुनिया नहीं बल्कि उनका खेलों के प्रति जुनून है। जहां आमतौर पर स्टारकिड्स अपने माता-पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए एक्टिंग या फिल्म निर्माण में करियर बनाना चाहते हैं, वहीं वेदांत ने एक अलग राह चुनी है।

वेदांत माधवन का सपना है कि वह तैराकी (स्विमिंग) में भारत का नाम रोशन करें और एक दिन ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतें। इसके लिए वह कड़ी मेहनत और अनुशासन के साथ लगातार ट्रेनिंग कर रहे हैं।


ग्लैमर से दूरी, लक्ष्य पर पूरा फोकस

वेदांत ने साफ तौर पर फिल्मी दुनिया से दूरी बना रखी है। उन्हें न तो एक्टिंग में दिलचस्पी है और न ही निर्देशन में। उनका पूरा ध्यान खेल और अपने लक्ष्य पर केंद्रित है। यह उन्हें उन स्टारकिड्स से अलग बनाता है, जो आमतौर पर लाइमलाइट में रहना पसंद करते हैं।


दुबई में पढ़ाई और ट्रेनिंग

वर्तमान में वेदांत दुबई में पढ़ाई कर रहे हैं और वहीं पर अपनी स्विमिंग की ट्रेनिंग भी ले रहे हैं। बेहतर सुविधाओं और इंटरनेशनल स्तर के कोचिंग माहौल के चलते उन्होंने विदेश में रहकर तैयारी करने का फैसला किया है।

उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए उसी स्तर की ट्रेनिंग जरूरी होती है। दुबई में उन्हें कई अनुभवी कोच और प्रतिस्पर्धी तैराकों के साथ अभ्यास करने का मौका मिल रहा है।


बेहद सख्त दिनचर्या

वेदांत की दिनचर्या बेहद अनुशासित और कठिन है। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि वह रोज सुबह करीब 4:30 बजे उठते हैं और 4:45 तक स्विमिंग पूल पहुंच जाते हैं। वहां वह करीब 2 घंटे तक तैराकी करते हैं। इसके बाद स्ट्रेचिंग और थोड़े आराम के बाद दिन का बाकी हिस्सा पढ़ाई और ट्रेनिंग में बिताते हैं।

शाम को वह फिर से पूल में लौटते हैं और करीब 7:30 बजे से लेकर 9:30 बजे तक लगातार अभ्यास करते हैं। इस तरह वे रोजाना लगभग 4 घंटे स्विमिंग करते हैं।


अनुशासन और त्याग का महत्व

वेदांत का मानना है कि किसी भी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए अनुशासन और त्याग बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि इस रास्ते में कई चीजों का त्याग करना पड़ता है, लेकिन सबसे जरूरी है खुद पर विश्वास रखना।

उनके कोच ने उन्हें सिखाया है कि भविष्य की चिंता करने के बजाय वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए। इसी सोच के साथ वेदांत हर दिन अपनी ट्रेनिंग में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करते हैं।


नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा

वेदांत माधवन उन युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभर रहे हैं, जो अपने सपनों को पूरा करने के लिए अलग रास्ता चुनना चाहते हैं। उन्होंने यह साबित किया है कि स्टारकिड होने के बावजूद सफलता के लिए मेहनत और समर्पण ही सबसे महत्वपूर्ण है।


निष्कर्ष

जहां एक तरफ फिल्मी दुनिया का आकर्षण कई लोगों को अपनी ओर खींचता है, वहीं वेदांत माधवन ने खेलों को चुनकर एक नई मिसाल पेश की है। उनका ओलंपिक गोल्ड का सपना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय हो सकता है। आने वाले समय में उनकी मेहनत और लगन उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच पर बड़ी सफलता दिला सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *