16 Jun 2026, Tue

2006 का वो खतरनाक राजनीतिक मर्डर जिसने हिला दी थी पूरी महाराष्ट्र की सियासत, अब फैसला आने वाला है

महाराष्ट्र की राजनीति के सबसे चर्चित और संवेदनशील मामलों में शामिल पवनराजे निंबालकर हत्याकांड में अब फैसला आने का समय नजदीक है। मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत इस बहुचर्चित मामले में 20 जून को अपना फैसला सुनाएगी। पहले यह फैसला 17 जून को सुनाया जाना था, लेकिन एक पक्ष के वकील के अनुरोध पर अदालत ने सुनवाई की तारीख बढ़ा दी। इस मामले में महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री पदमसिंह पाटिल समेत आठ आरोपियों पर मुकदमा चल रहा है।

यह मामला पिछले लगभग दो दशकों से महाराष्ट्र की राजनीति और न्यायिक व्यवस्था के केंद्र में बना हुआ है। राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, कथित सुपारी किलिंग और प्रभावशाली नेताओं की भूमिका के आरोपों के कारण यह केस लंबे समय से सुर्खियों में रहा है। अदालत के फैसले पर अब पूरे राज्य की नजरें टिकी हुई हैं।

2006 में हुई थी दोहरी हत्या

यह घटना 3 जून 2006 की है, जब कांग्रेस नेता पवनराजे निंबालकर अपने ड्राइवर भूषण महादिक के साथ कार से यात्रा कर रहे थे। नवी मुंबई के कलंबोली इलाके के पास कुछ हमलावरों ने उनकी कार को रोक लिया और ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। हमले में पवनराजे निंबालकर और उनके ड्राइवर की मौके पर ही मौत हो गई।

इस सनसनीखेज हत्या ने पूरे महाराष्ट्र में राजनीतिक हलचल मचा दी थी। घटना के बाद मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, जिसने विस्तृत जांच के बाद कई लोगों के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया।

पदमसिंह पाटिल पर गंभीर आरोप

सीबीआई के अनुसार, यह हत्या राजनीतिक दुश्मनी का परिणाम थी। जांच एजेंसी ने दावा किया कि हत्या को अंजाम देने के लिए 25 लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। मामले में महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और वरिष्ठ नेता पदमसिंह बाजीराव पाटिल को मुख्य आरोपी बनाया गया।

पदमसिंह पाटिल राज्य की राजनीति में लंबे समय तक प्रभावशाली नेता रहे हैं। वह महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के सगे भाई भी हैं। इस कारण यह मामला राजनीतिक रूप से और भी अधिक चर्चित बन गया।

128 गवाहों के बयान हुए दर्ज

मामले की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अदालत के समक्ष कई महत्वपूर्ण सबूत पेश किए। इस केस में कुल 128 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं। इनमें प्रसिद्ध समाजसेवी अन्ना हजारे का नाम भी शामिल है।

करीब 20 वर्षों तक चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान कई बार सुनवाई टली और विभिन्न कानूनी प्रक्रियाओं के कारण मामला लंबा खिंचता रहा। हाल ही में कुछ आरोपियों की स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के चलते सुनवाई को अस्थायी रूप से स्थगित भी किया गया था।

कौन थे पवनराजे निंबालकर?

पवनराजे निंबालकर उस्मानाबाद जिले के एक लोकप्रिय कांग्रेस नेता थे। उन्होंने सहकारी संस्थाओं और स्थानीय राजनीति में अपनी मजबूत पहचान बनाई थी। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, वह तेजी से उभरते हुए ऐसे नेता थे जो क्षेत्र में पदमसिंह पाटिल के प्रभाव को चुनौती देने लगे थे।

दिलचस्प बात यह है कि राजनीतिक करियर की शुरुआत में निंबालकर को पदमसिंह पाटिल का करीबी माना जाता था। लेकिन समय के साथ दोनों नेताओं के बीच मतभेद बढ़ते गए और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा खुलकर सामने आने लगी।

अब 20 जून को आने वाले अदालत के फैसले से यह तय होगा कि इस बहुचर्चित राजनीतिक हत्याकांड में आरोपियों की भूमिका को लेकर न्यायालय क्या निष्कर्ष निकालता है। पूरे महाराष्ट्र में इस फैसले को लेकर उत्सुकता बनी हुई है।

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