तमिलनाडु की मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली सरकार ने ग्रामीण श्रमिकों को अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराने के लिए बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजना के तहत निर्धारित 125 दिनों का काम पूरा करने वाले पात्र परिवारों को 25 दिन का अतिरिक्त सवैतनिक रोजगार देने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद पात्र ग्रामीण परिवारों को एक साल में कुल 150 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाना, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहायता देना और उनकी आजीविका को मजबूत करना है।
125 दिन के बाद मिलेगा 25 दिन का अतिरिक्त काम
सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, संबंधित रोजगार योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी वाले रोजगार की कानूनी गारंटी दी गई है। अब तमिलनाडु सरकार अपने राज्य कोष से अतिरिक्त 25 दिनों का रोजगार उपलब्ध कराएगी। इस तरह योजना के पात्र लाभार्थियों को साल में कुल 150 दिनों तक काम मिलने का अवसर मिल सकता है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराने की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू की जाए। इसके लिए ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग ने प्रशासनिक मंजूरी भी दी है। सरकार का मानना है कि अतिरिक्त रोजगार से ग्रामीण परिवारों को आर्थिक सहारा मिलेगा और उन्हें साल के दौरान अधिक दिनों तक काम मिल सकेगा।
महिलाओं और कमजोर वर्गों को मिलेगी प्राथमिकता
इस योजना के तहत अतिरिक्त रोजगार उपलब्ध कराने में समाज के कमजोर वर्गों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि महिला मुखिया वाले परिवारों को प्राथमिकता दी जाए। इसके अलावा अकेली महिलाओं और दिव्यांग सदस्यों वाले परिवारों को भी विशेष रूप से लाभ पहुंचाने की व्यवस्था की गई है।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के परिवारों को भी प्राथमिकता सूची में शामिल किया गया है। इसके साथ ही वन अधिकार कानून, 2006 के तहत पात्र लाभार्थियों को भी योजना का लाभ देने पर जोर दिया गया है।
राज्य सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अतिरिक्त रोजगार का फायदा उन परिवारों तक पहुंचे, जिन्हें आर्थिक सहायता और काम के अवसरों की सबसे अधिक आवश्यकता है।
चेन्नई को छोड़कर जिलों में होगा राशि का वितरण
प्रशासनिक व्यवस्था के तहत ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के आयुक्त को चेन्नई को छोड़कर राज्य के अन्य जिलों में राशि वितरित करने के लिए अधिकृत किया गया है। इस व्यवस्था के जरिए अतिरिक्त रोजगार कार्यक्रम को संबंधित जिलों में लागू करने की तैयारी की गई है।
हालांकि, योजना के वास्तविक लाभ के लिए पात्रता, काम की उपलब्धता और सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन जरूरी होगा। लाभार्थियों को रोजगार उपलब्ध कराने की प्रक्रिया संबंधित प्रशासनिक नियमों के अनुसार संचालित की जाएगी।
क्या है ग्रामीण रोजगार योजना का उद्देश्य?
ग्रामीण रोजगार योजना का मुख्य उद्देश्य गांवों में रहने वाले परिवारों को मजदूरी आधारित काम उपलब्ध कराना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसके अंतर्गत ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास, जल संरक्षण और आजीविका से जुड़े कार्यों को बढ़ावा दिया जाता है।
नई व्यवस्था में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी के साथ तमिलनाडु सरकार की ओर से 25 अतिरिक्त दिनों का रोजगार उपलब्ध कराने की पहल की गई है। इससे पात्र परिवारों को अधिक समय तक काम मिलने की संभावना बढ़ेगी।
राज्य सरकार के इस फैसले को ग्रामीण श्रमिकों की आय और रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब इस पहल का प्रभाव इसके जमीनी स्तर पर लागू होने और पात्र परिवारों तक लाभ पहुंचने पर निर्भर करेगा।

