5 Jun 2026, Fri

‘हिंसा हारी, मोहब्बत जीती’, दो खूंखार नक्सलियों ने लिए सात फेरे; पुलिस बनी बाराती

गोंदिया: कभी जंगलों में हथियार लेकर सक्रिय रहने वाले दो पूर्व नक्सलियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की है। महाराष्ट्र के गोंदिया में आयोजित एक भावुक समारोह में दोनों ने विवाह के बंधन में बंधकर समाज की मुख्यधारा में लौटने का मजबूत संदेश दिया। यह शादी सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं, बल्कि बदलाव, पुनर्वास और नई उम्मीदों का प्रतीक बन गई है।

गोंदिया पुलिस मुख्यालय स्थित ‘प्रेरणा सभागार’ में आयोजित इस विशेष विवाह समारोह में पुलिस अधिकारी और जवान भी परिवार के सदस्यों की तरह शामिल हुए। समारोह के दौरान मौजूद लोगों ने इस पल को भावुक और प्रेरणादायक बताया। पुलिस अधिकारियों ने इसे पुनर्वास नीति की बड़ी सफलता करार दिया।

दूल्हे की पहचान पांडू पुसू वड्डे उर्फ गोलू (37) के रूप में हुई है, जो छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले का निवासी है। वह पहले प्रतिबंधित माओवादी संगठन में डिविजनल कमेटी सदस्य (DVCM) जैसे महत्वपूर्ण पद पर सक्रिय था। वहीं दुल्हन सैवंती रायसिंग पंधरे उर्फ संगीता (36) मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले की रहने वाली है और माओवादी संगठन में एरिया कमेटी सदस्य (ACM) के रूप में कार्य कर चुकी है।

दोनों लंबे समय तक नक्सली गतिविधियों में शामिल रहे, लेकिन हिंसा और असुरक्षित जीवन से तंग आकर उन्होंने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। पिछले वर्ष 28 नवंबर को दोनों ने गोंदिया पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बाद से वे पुनर्वास प्रक्रिया के तहत पुलिस संरक्षण में रह रहे थे।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण के बाद दोनों ने सामान्य जीवन जीने और परिवार बसाने की इच्छा व्यक्त की थी। इसी इच्छा को सम्मान देते हुए पुलिस प्रशासन ने उनकी शादी का आयोजन कराया। समारोह में पुलिस अधिकारी, जवान और अन्य कर्मचारी घराती और बाराती की भूमिका में नजर आए, जिससे यह आयोजन और भी विशेष बन गया।

गोंदिया के पुलिस अधीक्षक ने इस अवसर पर कहा कि यह विवाह केवल एक सामाजिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह परिवर्तन, विश्वास और शांतिपूर्ण भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उनके लिए सरकार और प्रशासन हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत अब इस नवविवाहित जोड़े को नागरिक जीवन की सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इनके आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र, बैंक खाते और अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे सम्मानपूर्वक रोजगार प्राप्त कर सकें और सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।

यह शादी उन लोगों के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश है जो अब भी नक्सलवाद के रास्ते पर हैं। यह उदाहरण दिखाता है कि हिंसा छोड़ने के बाद समाज और सरकार दोनों ऐसे लोगों को स्वीकार करने और उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए तैयार हैं।

गोंदिया में संपन्न यह अनोखा विवाह न केवल दो दिलों का मिलन है, बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी है कि सही अवसर और समर्थन मिलने पर कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी को नई दिशा दे सकता है। यह घटना पुनर्वास और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक सकारात्मक और प्रेरणादायक कदम मानी जा रही है।

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