मौसम में बदलाव के साथ फ्लू और सांस से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इसी बीच स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण को लेकर भी लोगों में चिंता देखने को मिल रही है। यह एक वायरल संक्रमण है, जिसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे हो सकते हैं। बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, सिरदर्द, ठंड लगना और थकान इसके आम लक्षणों में शामिल हैं। हालांकि, हर संक्रमित व्यक्ति में बुखार होना जरूरी नहीं है।
बीमारी से बचाव के लिए शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाए रखना जरूरी माना जाता है। आयुर्वेद में भी खानपान और जीवनशैली के जरिए शरीर की प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत रखने पर जोर दिया जाता है। कुछ सामान्य जड़ी-बूटियों और मसालों को डाइट का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इन्हें स्वाइन फ्लू का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।
गिलोय का किया जाता है इस्तेमाल
आयुर्वेद में गिलोय का इस्तेमाल लंबे समय से किया जाता रहा है। इसे खासतौर पर बुखार और रोग प्रतिरोधक क्षमता से जुड़े पारंपरिक उपायों में शामिल किया जाता है। माना जाता है कि यह शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को सपोर्ट कर सकती है।
हालांकि, गिलोय का सेवन हर व्यक्ति के लिए उचित हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए किसी बीमारी की स्थिति में इसका इस्तेमाल करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
तुलसी से मिल सकती है राहत
तुलसी को भी आयुर्वेद में महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है। इसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से सर्दी, खांसी और गले से जुड़ी परेशानियों में किया जाता है। तुलसी की चाय या अन्य सामान्य रूपों में इसका सेवन किया जाता है।
फिर भी, अगर किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे गंभीर लक्षण दिखाई दे रहे हैं तो केवल तुलसी या किसी अन्य घरेलू उपाय पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
हल्दी को डाइट में करें शामिल
हल्दी भारतीय खानपान का अहम हिस्सा है। इसमें ऐसे प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं जिनमें सूजन कम करने वाले गुणों पर अध्ययन हुआ है। इसे दूध, सब्जियों या भोजन में मसाले के तौर पर शामिल किया जा सकता है।
हालांकि, हल्दी का सेवन H1N1 संक्रमण को खत्म नहीं करता। इसे केवल संतुलित खानपान का हिस्सा समझना चाहिए।
खानपान के साथ इन बातों का रखें ध्यान
फ्लू और अन्य वायरल संक्रमणों से बचाव के लिए पर्याप्त नींद लेना, शरीर को हाइड्रेट रखना और पौष्टिक भोजन करना जरूरी है। फल, सब्जियां, दालें और प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करना मददगार हो सकता है। हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखना और बीमार व्यक्ति के बहुत करीब जाने से बचना भी जरूरी है।
अगर तेज बुखार, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द, लगातार कमजोरी या लक्षण तेजी से बिगड़ने जैसी स्थिति हो तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को फ्लू के लक्षण होने पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां और पौष्टिक खानपान शरीर को सपोर्ट कर सकते हैं, लेकिन H1N1 जैसे वायरल संक्रमण में डॉक्टर की सलाह और आवश्यक चिकित्सा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

