आजकल किचन में नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल काफी आम हो गया है। कम तेल में खाना बनाने और आसानी से सफाई हो जाने के कारण लोग इन्हें पसंद करते हैं। हालांकि, लंबे समय तक इस्तेमाल और कोटिंग खराब होने की स्थिति में इन बर्तनों को लेकर सेहत से जुड़े सवाल भी उठते रहे हैं। ऐसे में खाना पकाने के लिए पारंपरिक और बिना कोटिंग वाले बर्तनों को बेहतर विकल्प माना जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, खाना बनाने के लिए बर्तन का चुनाव करते समय उसकी सामग्री, इस्तेमाल का तरीका और उसकी स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है। अगर नॉन-स्टिक बर्तन की कोटिंग खुरचने लगे या उसमें दरारें नजर आने लगें तो उसे बदल देना चाहिए। इसके अलावा तेज आंच पर ऐसे बर्तनों का इस्तेमाल करने से भी बचना चाहिए।
कास्ट आयरन के बर्तन
कास्ट आयरन यानी लोहे के बर्तन खाना पकाने के लिए पुराने समय से इस्तेमाल होते आ रहे हैं। इन बर्तनों में खाना पकाने के दौरान थोड़ी मात्रा में आयरन भोजन में शामिल हो सकता है। खासकर जिन लोगों के भोजन में आयरन की मात्रा कम होती है, उनके लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है। हालांकि, कास्ट आयरन में बहुत अधिक खट्टी या एसिडिक चीजें लंबे समय तक पकाने से बचना चाहिए। टमाटर, नींबू या बहुत अधिक खट्टे व्यंजनों के लिए दूसरे बर्तनों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
स्टेनलेस स्टील के बर्तन
स्टेनलेस स्टील के बर्तन भारतीय रसोई में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले विकल्पों में शामिल हैं। ये मजबूत, टिकाऊ और साफ करने में अपेक्षाकृत आसान होते हैं। इनमें सब्जियां, दाल, चावल और कई तरह के व्यंजन आसानी से बनाए जा सकते हैं। अच्छी गुणवत्ता वाले स्टेनलेस स्टील के बर्तनों को रोजमर्रा की कुकिंग के लिए सुविधाजनक विकल्प माना जाता है।
मिट्टी के बर्तन
मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने की परंपरा काफी पुरानी है। धीमी आंच पर मिट्टी के बर्तन में पकाया गया खाना स्वाद और खुशबू के लिहाज से अलग अनुभव देता है। हालांकि, इन बर्तनों का इस्तेमाल करते समय उनकी गुणवत्ता और सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बर्तन में किसी तरह की दरार या टूट-फूट हो तो उसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
कांसे और पीतल के बर्तन
कांसे और पीतल के बर्तन भी पारंपरिक भारतीय रसोई का हिस्सा रहे हैं। इनका इस्तेमाल करते समय यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बर्तन सही तरीके से तैयार और सुरक्षित हों। खासकर ऐसे बर्तनों में भोजन को लंबे समय तक स्टोर करने से बचना चाहिए और इस्तेमाल से पहले उनकी सफाई पर ध्यान देना चाहिए।
बर्तन चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान
खाना बनाने के लिए किसी भी बर्तन का चुनाव करते समय केवल उसकी चमक या डिजाइन को देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। बर्तन की गुणवत्ता, उसकी सतह और इस्तेमाल का सही तरीका अधिक महत्वपूर्ण है। नॉन-स्टिक बर्तनों की कोटिंग अगर खराब हो गई है तो उसे इस्तेमाल करने से बचें। वहीं लोहे या कास्ट आयरन के बर्तनों को इस्तेमाल के बाद अच्छी तरह सुखाना जरूरी है, ताकि उनमें जंग न लगे।
कुल मिलाकर, रसोई में अलग-अलग तरह के बर्तनों का इस्तेमाल उनकी खूबियों और व्यंजन के हिसाब से किया जा सकता है। सही बर्तन का चुनाव करने के साथ उसकी नियमित सफाई और उचित रखरखाव भी उतना ही जरूरी है।

