फिल्मी दुनिया की चमक-धमक और स्टारडम का आकर्षण अक्सर स्टारकिड्स को अभिनय या मनोरंजन उद्योग की ओर खींच लेता है। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो अपनी अलग पहचान बनाने का साहस रखते हैं। ऐसे ही एक प्रेरणादायक नाम हैं Srutanjay Narayanan, जिन्होंने ग्लैमर की दुनिया से दूर रहकर प्रशासनिक सेवा को अपना करियर बनाया और आज एक सफल IAS अधिकारी के रूप में पहचान बना चुके हैं।
श्रुतंजय नारायणन तमिल सिनेमा के प्रसिद्ध हास्य अभिनेता Chinni Jayanth के बेटे हैं। चिन्नी जयंत ने 1980 और 1990 के दशक में तमिल फिल्मों में अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई थी। उन्होंने कई फिल्मों में सुपरस्टार Rajinikanth के साथ काम किया और अपनी अलग पहचान बनाई। ऐसे प्रतिष्ठित फिल्मी परिवार से आने के बावजूद श्रुतंजय ने अभिनय के बजाय प्रशासनिक सेवा का कठिन रास्ता चुना।
श्रुतंजय बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखते थे और समाज के लिए कुछ अलग करने का सपना देखते थे। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद चेन्नई के प्रतिष्ठित गुइंडी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने Ashoka University से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने तय कर लिया था कि वे देश की प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा बनना चाहते हैं।
UPSC जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के दौरान श्रुतंजय ने काफी संघर्ष किया। उन्होंने कभी अपने पिता की लोकप्रियता या आर्थिक स्थिति का सहारा नहीं लिया। तैयारी के लिए वे एक स्टार्टअप में नौकरी करते थे। रात की शिफ्ट में काम करने के बाद दिन में कई घंटों तक सेल्फ स्टडी करते थे। सीमित समय और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया।
उनकी मेहनत रंग लाई और साल 2015 में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा अपने दूसरे प्रयास में शानदार सफलता के साथ पास की। उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 75 हासिल की, जो किसी भी उम्मीदवार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। समाजशास्त्र उनका वैकल्पिक विषय था। सफलता के बाद उन्हें तमिलनाडु कैडर मिला, जहां उन्होंने प्रशासनिक सेवा में अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाया।
अपने कार्यकाल के दौरान श्रुतंजय नारायणन ने तिरुप्पुर में सब-कलेक्टर और विल्लुपुरम में एडिशनल कलेक्टर जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उन्होंने सरकारी योजनाओं को आम जनता तक पहुंचाने और प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनकी कार्यशैली और सादगी लोगों को काफी प्रभावित करती है।
श्रुतंजय नारायणन की कहानी उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो अपनी मेहनत और लगन के दम पर जीवन में बड़ी सफलता हासिल करना चाहते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि पहचान परिवार के नाम से नहीं, बल्कि अपने कर्म और समर्पण से बनती है।

