बिहार के गया में चल रहे पितृपक्ष मेले में देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इसी क्रम में रूस से आईं पांच महिला श्रद्धालुओं ने फल्गु नदी के देवघाट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के लिए विधि-विधान से पिंडदान किया। विदेशी महिलाओं को भारतीय परंपरा के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान करते देखकर देवघाट पर मौजूद लोग भी कुछ देर के लिए रुक गए।
बताया जा रहा है कि पितृपक्ष मेले के 14वें दिन रूस की पांच महिलाएं देवघाट पहुंचीं। सभी महिलाएं भारतीय सनातनी वेशभूषा में नजर आईं। उन्होंने जमीन पर बैठकर पुरोहितों के मार्गदर्शन में पूजा-अर्चना की और पिंडदान की पूरी प्रक्रिया को धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूरा किया।
पितरों की मोक्ष और आत्मा की शांति के लिए किया पिंडदान
गया में पिंडदान की परंपरा को पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष से जोड़कर देखा जाता है। इसी धार्मिक मान्यता से प्रभावित होकर रूस की इन महिलाओं ने अपने पूर्वजों के लिए यहां पिंडदान करने का निर्णय लिया।
पूजा के दौरान उन्होंने पुरोहितों द्वारा बताए गए विधि-विधान का पालन किया। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान महिलाओं ने भारतीय परंपराओं के प्रति अपनी रुचि और सम्मान भी दिखाया। विदेशी श्रद्धालुओं का यह रूप देवघाट पर मौजूद लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बना रहा।
धार्मिक महत्व जानने के बाद लिया फैसला
जानकारी के मुताबिक, रूस से आए कुछ पर्यटकों ने जुलाई में गया का दौरा किया था। इस दौरान वे इस्कॉन मंदिर भी पहुंचे, जहां उन्हें गया की धार्मिक महत्ता और पितृपक्ष के दौरान किए जाने वाले पिंडदान की प्राचीन परंपरा के बारे में जानकारी मिली।
गया की धार्मिक मान्यताओं और पितरों के लिए किए जाने वाले कर्मकांड के महत्व को समझने के बाद रूस की इन महिलाओं ने अपने पूर्वजों के लिए यहां पिंडदान करने का फैसला किया। इसके बाद पितृपक्ष मेले के दौरान वे गया पहुंचीं और देवघाट पर धार्मिक अनुष्ठान पूरा किया।
विदेशी श्रद्धालुओं में बढ़ रही रुचि
गया में पिंडदान करने के लिए अब केवल भारत के अलग-अलग हिस्सों से ही श्रद्धालु नहीं पहुंचते, बल्कि विदेशों से भी लोग यहां आते हैं। इससे पहले ऑस्ट्रेलिया, यूक्रेन और अफ्रीका सहित कई देशों से आए श्रद्धालुओं द्वारा गया में पिंडदान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान किए जाने की जानकारी सामने आती रही है।
विदेशी श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या यह भी दर्शाती है कि भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और धार्मिक अनुष्ठानों को लेकर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।
पर्यटन से आगे बढ़कर परंपराओं को समझने की कोशिश
गया आने वाले विदेशी श्रद्धालुओं में अब केवल घूमने और ऐतिहासिक स्थलों को देखने की रुचि ही नहीं है। कई विदेशी पर्यटक भारतीय धर्म, आध्यात्मिकता और प्राचीन परंपराओं को करीब से समझने की कोशिश भी कर रहे हैं।
रूस की पांच महिलाओं का देवघाट पर पिंडदान करना इसी बदलती रुचि की एक तस्वीर के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय वेशभूषा में बैठकर पूरे विधि-विधान से पूजा और पिंडदान करने का उनका अंदाज वहां मौजूद लोगों के लिए खास अनुभव रहा।
पितृपक्ष मेले में इस तरह विदेशी श्रद्धालुओं की भागीदारी गया की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सामने लाती है। फल्गु नदी के तट पर हुआ यह अनुष्ठान भारतीय परंपराओं के प्रति विदेशी लोगों की बढ़ती जिज्ञासा और आस्था को दर्शाता नजर आया।

