संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत सोमवार को भारी हंगामे के साथ हुई। सत्र के पहले ही दिन लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। लगातार हो रहे हंगामे के चलते दोनों सदनों की कार्यवाही अंततः मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई। यह मॉनसून सत्र 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं।
सत्र के पहले दिन विपक्ष ने NEET पेपर लीक, राम मंदिर चढ़ावा विवाद और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की कोशिश की। विपक्षी सांसदों के नारेबाजी और विरोध के कारण सदन में कोई महत्वपूर्ण चर्चा नहीं हो सकी। कई बार कार्यवाही रोकनी पड़ी, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं होने पर लोकसभा और राज्यसभा दोनों को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया गया।
सरकार इस मॉनसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। हालांकि, पहले दिन विपक्ष के हंगामे के कारण प्रस्तावित वंदे मातरम् विधेयक लोकसभा में पेश नहीं किया जा सका। सरकार की ओर से सत्र में कुल सात प्रमुख विधेयक लाए जाने की योजना है, जिनमें इनकम टैक्स संशोधन विधेयक, सुप्रीम कोर्ट संशोधन विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक, राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम संशोधन विधेयक, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास संशोधन विधेयक, विदेशी अंशदान विनियमन (FCRA) संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक शामिल हैं।
इसके अलावा, राजनीतिक गलियारों में परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण विधेयक को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, सरकार ने अभी तक इन दोनों विधेयकों को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं की है। बदले हुए राजनीतिक समीकरणों और लोकसभा में संख्या बल को देखते हुए इन मुद्दों पर भी सबकी नजर बनी हुई है।
सत्र शुरू होने से पहले हुई सर्वदलीय बैठक भी विवादों में रही। बैठक में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बागी सांसदों को आमंत्रित किए जाने का विपक्ष ने विरोध किया और कई विपक्षी दलों ने बैठक से वॉकआउट कर दिया। इससे संसद सत्र शुरू होने से पहले ही राजनीतिक माहौल गरमा गया था।
मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित करते हुए सभी राजनीतिक दलों से सदन को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और यहां जनहित के मुद्दों पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं की उपलब्धियों की भी सराहना करते हुए कहा कि उनका आत्मविश्वास और मेहनत विकसित भारत की सबसे बड़ी ताकत है।
अब सभी की नजर संसद के अगले दिन की कार्यवाही पर है। उम्मीद की जा रही है कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कम होगा और महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह अपने प्रमुख मुद्दों को लेकर सरकार को लगातार घेरता रहेगा।

