कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर उठापटक का दौर जारी है। लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी के कई सांसदों के रुख को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं। इसी बीच टीएमसी सांसद और बॉलीवुड अभिनेता से नेता बने शत्रुघ्न सिन्हा को लेकर भी कई तरह की चर्चाएं सामने आईं। खबरें थीं कि वह उन सांसदों में शामिल हैं जिन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में शामिल होने की इच्छा जताई है। हालांकि अब उनके करीबी सूत्रों ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है।
सूत्रों के मुताबिक शत्रुघ्न सिन्हा ने किसी भी ऐसे पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जिसमें टीएमसी छोड़ने या एनडीए में शामिल होने की बात कही गई हो। उनके करीबियों का कहना है कि मीडिया में चल रही ऐसी खबरें पूरी तरह गलत हैं और सांसद फिलहाल दिल्ली से बाहर हैं। हालांकि इस पूरे विवाद पर अभी तक शत्रुघ्न सिन्हा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दरअसल हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थीं कि टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए में शामिल होने की इच्छा जाहिर की है। जिन नेताओं के नाम इस कथित सूची में बताए गए, उनमें यूसुफ पठान, काकोली घोष दस्तीदार, सायोनी घोष, रचना बनर्जी, देव अधिकारी और शत्रुघ्न सिन्हा जैसे कई चर्चित चेहरे शामिल थे। इस खबर ने बंगाल की राजनीति में हलचल मचा दी थी और टीएमसी के भीतर संभावित टूट की चर्चाएं तेज हो गई थीं।
हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा के करीबी सूत्रों के बयान के बाद तस्वीर कुछ अलग नजर आ रही है। सूत्रों का दावा है कि अभिनेता-राजनेता अभी भी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व पर भरोसा रखते हैं और पार्टी छोड़ने का कोई फैसला नहीं किया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जब तक शत्रुघ्न सिन्हा स्वयं इस मुद्दे पर सामने आकर कुछ नहीं कहते, तब तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं मानी जा सकती।
शत्रुघ्न सिन्हा पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद हैं। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी के टिकट पर जीत दर्ज की थी और पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। ऐसे में उनके नाम को लेकर उठी अटकलों ने राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा पैदा कर दी है।
इस बीच टीएमसी को एक और झटका तब लगा जब राज्यसभा सांसद प्रकाश चिक बराइक ने अपना इस्तीफा दे दिया। इससे पहले सुखेंदु शेखर रॉय और सुष्मिता देव भी राज्यसभा से इस्तीफा दे चुके हैं। लगातार हो रहे इस्तीफों और बगावत की खबरों ने विपक्ष को टीएमसी पर निशाना साधने का मौका दे दिया है।
फिलहाल बंगाल की राजनीति में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीएमसी अपने नेताओं को एकजुट रखने में सफल होगी या आने वाले दिनों में और बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिलेंगे। शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी भी इस सस्पेंस को और बढ़ा रही है।

