कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर बढ़ती खींचतान और बागी नेताओं की सक्रियता के बीच राज्यसभा सांसद Babul Supriyo का एक रहस्यमयी सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है। इस पोस्ट में उन्होंने पार्टी के भीतर भ्रष्टाचार को लेकर अप्रत्यक्ष रूप से सवाल उठाए हैं और साथ ही राजनीतिक बदलाव के संकेत भी दिए हैं। हालांकि उन्होंने साफ किया कि फिलहाल वह टीएमसी और मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली पार्टी के साथ ही खड़े हैं।
बाबुल सुप्रियो ने अपने लंबे पोस्ट की शुरुआत लोगों से उनकी बात को पूरी तरह पढ़ने की अपील करते हुए की। उन्होंने लिखा कि मीडिया लगातार उनसे यह सवाल पूछ रहा है कि वह किस पक्ष में हैं, लेकिन उनका जवाब साफ है कि वह वहीं हैं जहां उनकी पार्टी और नेता हैं। इसके बावजूद उनके पोस्ट के कई हिस्सों को राजनीतिक संकेतों के रूप में देखा जा रहा है।
टीएमसी सांसद ने कहा कि पश्चिम बंगाल की जनता ने विपक्ष को जो जनादेश दिया है, उसका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि वह अपने सांसद निधि (MPLAD) फंड का उपयोग जनता के हित में करेंगे और विकास कार्यों के लिए सभी संबंधित पक्षों के साथ सहयोग बनाए रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीति में मतभेद होने के बावजूद जनता के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
अपने पोस्ट में बाबुल सुप्रियो ने पुराने राजनीतिक अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के फैसले का सम्मान किया है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले भी राजनीतिक विरोध के बावजूद उन्होंने प्रशासन के साथ मिलकर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया था। उनके अनुसार, जनहित के मुद्दों पर राजनीतिक सीमाएं आड़े नहीं आनी चाहिए।
पोस्ट का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों पर कटाक्ष किया। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कहा कि कुछ नेता अचानक राजनीतिक “ज्ञान” प्राप्त कर रहे हैं और अपने पुराने विचारों से दूरी बना रहे हैं। इस टिप्पणी को बंगाल की राजनीति में हाल के दल-बदल और अंदरूनी असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है।
हालांकि बाबुल सुप्रियो ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनकी भारतीय जनता पार्टी में लौटने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपने राजनीतिक फैसले लेने का अधिकार है, लेकिन वह स्वयं किसी नए राजनीतिक विकल्प की तलाश में नहीं हैं। इसके बावजूद उनके पोस्ट ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर तेज कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बाबुल सुप्रियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम बंगाल में आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। टीएमसी के भीतर असंतोष, विपक्ष की सक्रियता और भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच उनका यह पोस्ट आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है। फिलहाल उनकी इस टिप्पणी को लेकर टीएमसी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

