भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई है। इस बैठक में रेपो रेट को लेकर अहम फैसला लिया जा सकता है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे महंगाई का जोखिम भी बढ़ गया है। ऐसे माहौल में ब्याज दरों को लेकर केंद्रीय बैंक का अगला कदम आम लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मौजूदा समय में रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। पिछले कुछ समय से इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अर्थशास्त्रियों और बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों के बीच इस बात को लेकर अलग-अलग राय है कि इस बार ब्याज दर बढ़ाई जाएगी या केंद्रीय बैंक मौजूदा स्तर पर ही इसे बरकरार रखेगा।
रेपो रेट बढ़ने की क्यों हो रही चर्चा?
महंगाई से जुड़े जोखिमों के कारण इस बार रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो यह लंबे समय के बाद नीतिगत ब्याज दर में बढ़ोतरी होगी। ब्याज दर बढ़ने का सीधा असर बैंकिंग सिस्टम पर पड़ सकता है और इसका प्रभाव होम लोन, कार लोन तथा दूसरे कर्ज की ब्याज दरों पर भी देखने को मिल सकता है।
हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि केंद्रीय बैंक इस बैठक में जल्दबाजी में कोई बदलाव नहीं करेगा। उनके अनुसार मौजूदा परिस्थितियों का आकलन करने के बाद रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा जा सकता है। ऐसे में कर्ज लेने वाले ग्राहकों को तत्काल राहत या अतिरिक्त बोझ से बचाया जा सकता है।
2023 के बाद पहली बढ़ोतरी की संभावना
रेपो रेट में आखिरी बार फरवरी 2023 में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई थी। इसके बाद लंबे समय तक नीतिगत ब्याज दर में बदलाव नहीं किया गया। फिर 2025 में ब्याज दरों में कटौती का दौर शुरू हुआ और मौजूदा रेपो रेट 5.25 प्रतिशत तक आ गया।
अब बदलते आर्थिक हालात के बीच एक बार फिर दरों में बढ़ोतरी की चर्चा शुरू हो गई है। अगर इस बार रेपो रेट बढ़ता है तो यह मौद्रिक नीति के रुख में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत माना जा सकता है।
दिसंबर में भी बढ़ोतरी के संकेत
कुछ आर्थिक अनुमानों में अक्टूबर के साथ दिसंबर में भी 0.25 प्रतिशत की संभावित बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। इसके पीछे खाद्य और ईंधन की कीमतों से पैदा होने वाले महंगाई के दबाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। अगर कीमतों में बढ़ोतरी व्यापक और लंबे समय तक बनी रहती है तो केंद्रीय बैंक महंगाई को नियंत्रित करने के लिए सख्त रुख अपना सकता है।
फिलहाल सभी की नजरें MPC के अंतिम फैसले पर टिकी हैं। बैठक में लिए गए फैसलों की घोषणा 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे की जाएगी। रेपो रेट में बदलाव होने पर इसका असर बैंक ग्राहकों, कर्ज की लागत और आने वाले समय में ब्याज दरों की दिशा पर पड़ सकता है।

