मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में कमजोरी देखने को मिली। दिनभर उतार-चढ़ाव के बीच कारोबार करने के बाद बीएसई सेंसेक्स 238.41 अंक गिरकर 77,470.11 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50.80 अंक फिसलकर 24,187.70 के स्तर पर आ गया। शुरुआती कारोबार में बाजार ने संभलने की कोशिश की, लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में बड़े शेयरों में बिकवाली बढ़ने से प्रमुख सूचकांक लाल निशान में बंद हुए।
बाजार पर सबसे ज्यादा दबाव बैंकिंग, आईटी, ऑटो और फार्मा सेक्टर के शेयरों से आया। विशेष रूप से एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई गिरावट ने सेंसेक्स और निफ्टी दोनों पर बड़ा असर डाला। बैंक का बाजार पूंजीकरण अधिक होने के कारण इसके शेयरों की कमजोरी पूरे बाजार की चाल पर भारी पड़ी।
मंगलवार के कारोबार में सिप्ला सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में शामिल रही और इसके शेयर करीब 2 प्रतिशत तक गिर गए। इसके अलावा डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज, मैक्स हेल्थकेयर, टीसीएस, इन्फोसिस, मारुति सुजुकी और टाटा मोटर्स के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। ऑटो सेक्टर में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जबकि आईटी शेयरों में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण बिकवाली जारी रही।
विश्लेषकों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बनी हुई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशकों की चिंता बढ़ गई है। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ने और कंपनियों की लागत पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाया। शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने लगभग 1,121 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने करीब 1,312 करोड़ रुपये की खरीदारी की, लेकिन यह बाजार को संभालने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुई।
बाजार की कमजोरी का एक बड़ा कारण एचडीएफसी बैंक के शेयरों में आई गिरावट भी रही। बैंक के हालिया तिमाही नतीजों में नेट इंटरेस्ट मार्जिन उम्मीद से कमजोर रहने के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। इसके चलते बैंक के शेयर करीब 2 प्रतिशत तक टूट गए, जिसका सीधा असर सेंसेक्स और निफ्टी पर देखने को मिला।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में बाजार की दिशा कई अहम कारकों पर निर्भर करेगी। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, विदेशी निवेशकों का रुख, कंपनियों के तिमाही नतीजे और अंतरराष्ट्रीय आर्थिक घटनाक्रम निवेशकों की धारणा तय करेंगे। यदि प्रमुख कंपनियों के परिणाम उम्मीद से बेहतर आते हैं और वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटती है, तो भारतीय शेयर बाजार में भी सुधार देखने को मिल सकता है।
फिलहाल निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे बाजार की मौजूदा अस्थिरता के बीच जल्दबाजी में फैसले लेने से बचें और मजबूत बुनियादी आधार वाली कंपनियों में दीर्घकालिक निवेश की रणनीति अपनाएं।

