5 Jun 2026, Fri

रात में जानवरों की आंखें क्यों चमकती हैं, एनिमल लवर्स भी नहीं जानते वजह; क्या आपको पता है

नई दिल्ली: रात के अंधेरे में सड़क किनारे या जंगलों में किसी जानवर की चमकती आंखें देखकर अक्सर लोग हैरान रह जाते हैं। कई बार टॉर्च या वाहन की हेडलाइट की रोशनी पड़ते ही बिल्ली, कुत्ता, हिरण, शेर या अन्य जानवरों की आंखें अचानक चमकने लगती हैं। यह दृश्य जितना रहस्यमय लगता है, इसके पीछे उतना ही रोचक वैज्ञानिक कारण भी छिपा हुआ है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जानवरों की आंखों में दिखाई देने वाली यह चमक किसी जादुई शक्ति का परिणाम नहीं, बल्कि उनकी आंखों की विशेष संरचना की वजह से होती है। इस संरचना को वैज्ञानिक भाषा में टेपिटम लुसिडम (Tapetum Lucidum) कहा जाता है। यह एक परावर्तक परत होती है, जो आंख की रेटिना के पीछे स्थित रहती है और कम रोशनी में देखने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देती है।

क्या है टेपिटम लुसिडम?

टेपिटम लुसिडम लैटिन भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है “चमकदार परत”। यह परत आंख में प्रवेश करने वाली रोशनी को वापस रेटिना की ओर परावर्तित करती है। सामान्य परिस्थितियों में जब प्रकाश आंख में प्रवेश करता है, तो उसका कुछ हिस्सा रेटिना द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है। लेकिन कम रोशनी वाले वातावरण में सभी प्रकाश किरणें पूरी तरह अवशोषित नहीं हो पातीं।

ऐसी स्थिति में टेपिटम लुसिडम उस बची हुई रोशनी को दोबारा रेटिना की ओर भेज देता है। इससे आंखों को प्रकाश का दूसरा अवसर मिलता है और जानवर अंधेरे में भी बेहतर तरीके से देख पाते हैं। जब टॉर्च या हेडलाइट की रोशनी इन आंखों पर पड़ती है, तो यही परावर्तित प्रकाश हमारी आंखों तक लौटता है, जिससे आंखें चमकती हुई दिखाई देती हैं।

किन जानवरों में होती है यह क्षमता?

यह विशेष संरचना मुख्य रूप से उन जानवरों में पाई जाती है जो रात के समय अधिक सक्रिय रहते हैं। इनमें बिल्लियां, कुत्ते, शेर, चीता, हिरण, गाय, घोड़े, लोमड़ी, रैकून और कोयोट जैसे जानवर शामिल हैं। इसके अलावा कुछ मछलियों, सरीसृपों, उभयचरों और कुछ पक्षियों में भी यह परत पाई जाती है।

वहीं मनुष्यों और दिन के समय सक्रिय रहने वाले कई जानवरों में यह परत नहीं होती। यही कारण है कि इंसानों की आंखें अंधेरे में इस प्रकार नहीं चमकतीं।

आंखों का रंग अलग-अलग क्यों दिखाई देता है?

अक्सर देखा जाता है कि रात में कुछ जानवरों की आंखें हरी, कुछ की नीली, लाल या पीली दिखाई देती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इसका कारण टेपिटम लुसिडम की संरचना और उसमें मौजूद पदार्थ होते हैं।

उदाहरण के लिए, बिल्लियों की आंखें आमतौर पर हरे या नीले रंग की चमक दिखाती हैं, जबकि हिरण की आंखें सफेद और कोयोट की आंखें लाल दिखाई दे सकती हैं। यह अंतर प्रकाश के कोण और परावर्तक परत की रासायनिक संरचना पर निर्भर करता है।

क्या हैं इसके फायदे?

टेपिटम लुसिडम जानवरों को रात में शिकार करने और शिकारी जानवरों से बचने में मदद करता है। शोधों के अनुसार, यह संरचना कुछ जानवरों की रात्रि दृष्टि को कई गुना बेहतर बना सकती है। हालांकि इससे कभी-कभी दृश्य थोड़ा धुंधला हो सकता है, लेकिन अंधेरे में देखने की अतिरिक्त क्षमता इसके मुकाबले कहीं अधिक लाभकारी साबित होती है।

प्रकृति की यह अनोखी व्यवस्था दिखाती है कि कैसे विभिन्न जीव अपने वातावरण के अनुसार विकसित हुए हैं। रात में चमकती आंखें केवल एक दृश्य प्रभाव नहीं, बल्कि जीवों की अद्भुत अनुकूलन क्षमता का वैज्ञानिक उदाहरण हैं।

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