5 Jun 2026, Fri

अक्षय कुमार और गोविंदा को स्टार बनाने वाले दिग्गज फिल्म मेकर पहलाज निहलानी का निधन, 76 साल की उम्र में ली आखिरी सांस

मुंबई: हिंदी फिल्म उद्योग से एक दुखद खबर सामने आई है। मशहूर फिल्म निर्माता और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के पूर्व अध्यक्ष पहलाज निहलानी का 76 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने 4 जून 2026 को अंतिम सांस ली। लंबे समय से वह लिवर संबंधी बीमारी से जूझ रहे थे और उनकी तबीयत लगातार खराब चल रही थी। उनके निधन की खबर से फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है।

परिवार की ओर से जारी बयान में उनके निधन की पुष्टि करते हुए कहा गया कि पहलाज निहलानी ने गुरुवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। परिवार ने बताया कि उनका अंतिम संस्कार मुंबई के सांताक्रूज हिंदू श्मशान घाट में किया गया। उनके निधन पर फिल्म जगत की कई हस्तियों ने शोक व्यक्त किया और भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को याद किया।

पहलाज निहलानी हिंदी सिनेमा के उन निर्माताओं में गिने जाते थे जिन्होंने कई कलाकारों के करियर को नई दिशा दी। उनके बैनर तले बनी फिल्मों ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता हासिल की, बल्कि कई सितारों को पहचान भी दिलाई। गोविंदा, अक्षय कुमार और सनी देओल जैसे कई बड़े कलाकारों के करियर में उनकी फिल्मों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1980 के दशक में फिल्म निर्माण से की थी। उनकी पहली फिल्म ‘हथकड़ी’ 1982 में रिलीज हुई थी। इसके बाद उन्होंने ‘आंधी-तूफान’, ‘आंखें’, ‘अंदाज’, ‘तलाश’, ‘घायल’, ‘शोला और शबनम’, ‘दिल तेरा दीवाना’, ‘पाप की दुनिया’, ‘गुनाहों का फैसला’, ‘आग का गोला’, ‘मिट्टी और सोना’ तथा ‘जूली 2’ जैसी कई चर्चित फिल्मों का निर्माण किया।

उनकी फिल्मों की खासियत यह थी कि वे व्यावसायिक मनोरंजन और दर्शकों की पसंद को अच्छी तरह समझते थे। एक निर्माता के रूप में उन्होंने एक्शन, कॉमेडी, ड्रामा और रोमांस जैसे विभिन्न शैलियों में काम किया। यही वजह रही कि उनकी कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुईं और दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहीं।

फिल्म निर्माण के अलावा पहलाज निहलानी ने फिल्म प्रमाणन और सेंसरशिप के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 2015 से 2017 तक उन्होंने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। इस दौरान उनके कई फैसले चर्चा और विवाद का विषय बने। फिल्मों में कट्स और प्रमाणन से जुड़े उनके निर्णयों ने फिल्म उद्योग में व्यापक बहस को जन्म दिया। इसके बावजूद उन्होंने हमेशा अपने फैसलों को दर्शकों और सामाजिक मूल्यों के हित में बताया।

पहलाज निहलानी को भारतीय सिनेमा में उनके लंबे और प्रभावशाली योगदान के लिए हमेशा याद किया जाएगा। उन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक फिल्म उद्योग में सक्रिय रहकर कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया और मनोरंजन जगत को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में योगदान दिया।

उनके निधन के साथ हिंदी फिल्म उद्योग ने एक ऐसे निर्माता को खो दिया है, जिसने अपनी फिल्मों, दृष्टिकोण और कार्यशैली से भारतीय सिनेमा पर गहरी छाप छोड़ी। फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के लिए यह एक अपूरणीय क्षति मानी जा रही है।

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