राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को ऑनलाइन मानहानि और कथित रूप से एआई की मदद से तैयार की गई आपत्तिजनक सामग्री से जुड़े मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से आंशिक राहत मिली है। कोर्ट ने सोशल मीडिया पर प्रसारित कुछ सामग्री को प्रथम दृष्टया मानहानिकारक मानते हुए उसे हटाने का निर्देश दिया है। हालांकि, अदालत ने सभी पोस्ट हटाने का व्यापक या ब्लैंकेट आदेश जारी करने से इनकार कर दिया।
जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने बुधवार, 1 जुलाई 2026 को अंतरिम आदेश सुनाते हुए चड्ढा की ओर से आपत्ति जताए गए पांच दस्तावेजों या सोशल मीडिया पोस्ट को हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला व्यक्तित्व अधिकारों यानी पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन का नहीं है। बाकी सामग्री को कोर्ट ने इस शुरुआती चरण में प्रथम दृष्टया मानहानिकारक नहीं माना। मामले का विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है।
‘पैसों के लिए खुद को बेचने’ वाले दावे पर आपत्ति
राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन पोस्ट के खिलाफ हाईकोर्ट का रुख किया था, जिनमें कथित तौर पर दावा किया गया था कि उन्होंने पैसों के लिए खुद को बेच दिया है। उनकी याचिका में कहा गया था कि ये पोस्ट दुर्भावनापूर्ण, झूठी और मनगढ़ंत हैं तथा इनसे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
चड्ढा ने यह भी आरोप लगाया था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल करके उनकी तस्वीरों, वीडियो और व्यक्तित्व से जुड़ी सामग्री में छेड़छाड़ की गई। उन्होंने कोर्ट से ऐसी सामग्री को तत्काल हटाने और भविष्य में इसके प्रसार पर रोक लगाने की मांग की थी।
कोर्ट ने नहीं दिया व्यापक प्रतिबंध
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने राजनीतिक आलोचना और मानहानि के बीच अंतर पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा था कि किसी राजनेता के राजनीतिक फैसलों की आलोचना को हर स्थिति में व्यक्तित्व अधिकारों का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोगों को आलोचना का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन झूठे और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले आरोप अलग श्रेणी में आते हैं।
अंतरिम आदेश सुनाते हुए जस्टिस प्रसाद ने कहा कि कुछ विशेष सामग्री को हटाने के निर्देश दिए गए हैं, लेकिन बाकी पोस्ट पहली नजर में मानहानिकारक नहीं लगतीं। इस प्रकार कोर्ट ने चड्ढा को सीमित राहत देते हुए इंटरनेट पर मौजूद सभी आलोचनात्मक पोस्ट हटाने की उनकी व्यापक मांग स्वीकार नहीं की।
मई में सुरक्षित रखा गया था फैसला
दिल्ली हाईकोर्ट ने 21 मई को अंतरिम राहत के मुद्दे पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। उस दौरान अदालत ने टिप्पणी की थी कि राजनीतिक आलोचना और मानहानि के बीच एक बेहद महीन रेखा होती है। अब कोर्ट ने पांच आपत्तिजनक पोस्ट हटाने का आदेश देते हुए बाकी सामग्री पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
राघव चड्ढा अप्रैल 2026 में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए थे। उनके इस राजनीतिक फैसले के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कई पोस्ट प्रसारित हुई थीं।
यह मामला सोशल मीडिया पर राजनीतिक आलोचना, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा की सुरक्षा और एआई से तैयार भ्रामक सामग्री के बीच कानूनी सीमाओं को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

