1 Aug 2026, Sat

‘मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है’, मौलाना मदनी ने वंदे मातरम् बिल पर उठाए सवाल

नई दिल्ली: वंदे मातरम् बिल को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। रिपोर्टों के अनुसार, संसद के दोनों सदनों से बिल पारित होने के बाद विभिन्न मुस्लिम संगठनों ने इसके कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) का कहना है कि बिल के कुछ पहलू धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवाल खड़े करते हैं। फिलहाल यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि मुसलमानों को किसी के वंदे मातरम् गाने या पढ़ने से आपत्ति नहीं है, लेकिन उनकी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इबादत केवल एक अल्लाह की होती है। उन्होंने कहा कि वंदे मातरम् के कुछ हिस्से इस्लामी मान्यताओं के अनुरूप नहीं माने जाते, इसलिए किसी भी व्यक्ति को इसे गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

मदनी ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने और धार्मिक आस्था के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है। उन्होंने अनुच्छेद 19 का भी उल्लेख करते हुए कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार नागरिकों को किसी विचार, गीत या नारे को स्वीकार या अस्वीकार करने की स्वतंत्रता भी देता है। उनका तर्क है कि धार्मिक विश्वास के विरुद्ध किसी प्रतीक या गीत को अनिवार्य बनाना संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं होगा।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। बोर्ड का कहना है कि यदि वंदे मातरम् के गायन को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाया जाता है, तो इससे धार्मिक और संवैधानिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है। बोर्ड ने कहा कि भारत जैसे बहुधार्मिक देश में किसी विशेष धार्मिक या सांस्कृतिक प्रतीक को सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू करने के प्रश्न पर व्यापक संवाद की आवश्यकता है।

रिपोर्टों के अनुसार, वंदे मातरम् बिल को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल चुकी है। यदि इसे राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलती है, तो राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान लागू हो सकता है। चर्चा में आए प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, वंदे मातरम् के गायन के दौरान अपमान, बाधा या जानबूझकर व्यवधान उत्पन्न करने पर दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान हो सकता है। हालांकि, अंतिम कानूनी स्थिति राष्ट्रपति की मंजूरी और अधिसूचना के बाद ही स्पष्ट होगी।

मदनी ने यह भी कहा कि देश इस समय बेरोजगारी, महंगाई, आर्थिक चुनौतियों, किसानों की समस्याओं और युवाओं के भविष्य जैसे गंभीर मुद्दों का सामना कर रहा है। उनके अनुसार संसद को इन विषयों पर अधिक प्राथमिकता के साथ चर्चा करनी चाहिए।

दूसरी ओर, बिल के समर्थकों का कहना है कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को सम्मान और कानूनी सुरक्षा प्रदान करना है। उनका तर्क है कि राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान होना चाहिए।

फिलहाल वंदे मातरम् बिल को लेकर बहस जारी है और अब सभी की नजर राष्ट्रपति की मंजूरी पर टिकी है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विधेयक किस रूप में कानून का हिस्सा बनता है और उसके प्रावधानों का दायरा क्या होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *