23 Apr 2026, Thu

महिला थाने की रीलबाज इंचार्ज शबाना आज़मी सस्पेंड, पुलिस मुख्यालय की सख्ती के बाद सोशल मीडिया से हटाने पड़े रील्स और वीडियो

वर्दी में रील बनाना पड़ा भारी: पूर्णिया में महिला थाना प्रभारी शबाना आज़मी निलंबित

बिहार के पूर्णिया जिले से पुलिस विभाग की सख्ती का एक बड़ा मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वर्दी में रील और वीडियो पोस्ट करने के आरोप में महिला थाना प्रभारी Shabana Azmi को निलंबित कर दिया गया है। उनके साथ एक अन्य महिला पुलिसकर्मी पर भी कार्रवाई की गई है। यह कदम पुलिस मुख्यालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के बाद उठाया गया है।

SOP उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई

बिहार पुलिस मुख्यालय ने हाल ही में सोशल मीडिया उपयोग को लेकर कड़े दिशा-निर्देश (SOP) जारी किए थे। इन नियमों के तहत ड्यूटी के दौरान या पुलिस वर्दी में व्यक्तिगत मनोरंजन के लिए वीडियो बनाना और उसे सोशल मीडिया पर साझा करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

इन्हीं निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में पूर्णिया की पुलिस अधीक्षक Sweety Sehrawat ने कार्रवाई करते हुए शबाना आज़मी को निलंबित कर दिया। एसपी के अनुसार, वर्दी में रील बनाकर पोस्ट करना पुलिस विभाग की गरिमा के खिलाफ है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इंस्टाग्राम पर सक्रिय थीं अधिकारी

जानकारी के मुताबिक, शबाना आज़मी इंस्टाग्राम पर काफी सक्रिय थीं और अक्सर पुलिस वर्दी में रील्स बनाकर पोस्ट करती थीं। ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते थे। हालांकि, विभागीय नियमों के तहत इस तरह की गतिविधियों को अनुशासनहीनता माना जाता है।

कार्रवाई के बाद उनके कई वीडियो सोशल मीडिया से हटा दिए गए हैं।

पहले भी विवादों में रही हैं

यह पहला मौका नहीं है जब शबाना आज़मी चर्चा में आई हों। इससे पहले, जब वह फणीश्वर नाथ रेणु टीओपी की प्रभारी थीं, तब उन्होंने अपने बुजुर्ग दादा को थाना प्रभारी की कुर्सी पर बैठाकर फोटो खिंचवाई थी, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी। उस समय भी इस घटना को लेकर सवाल उठे थे।

पुलिस विभाग की सख्ती का संदेश

इस मामले को पुलिस विभाग अनुशासन और छवि से जोड़कर देख रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर ऐसी गतिविधियां न केवल विभाग की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि कई बार संवेदनशील सूचनाओं के लीक होने का खतरा भी बढ़ा देती हैं।

पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि वर्दी में रहते हुए कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया जाना चाहिए, जिससे विभाग की गरिमा प्रभावित हो।

क्या कहते हैं नियम?

पुलिसकर्मियों के लिए बनाए गए नियमों के अनुसार:

  • ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का उपयोग सीमित होना चाहिए
  • वर्दी में निजी कंटेंट बनाना प्रतिबंधित है
  • संवेदनशील जानकारी या लोकेशन साझा करना अपराध की श्रेणी में आ सकता है

निष्कर्ष

पूर्णिया का यह मामला एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है कि सोशल मीडिया के दौर में भी सरकारी सेवा में अनुशासन सर्वोपरि है। पुलिस विभाग ने साफ संकेत दिया है कि नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, चाहे वह कोई भी अधिकारी क्यों न हो।

यह घटना अन्य पुलिसकर्मियों के लिए भी एक चेतावनी है कि सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी और मर्यादा के साथ किया जाए।

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