मनुस्मृति को लेकर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से की गई टिप्पणी पर विवाद बढ़ता जा रहा है। अब ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राहुल गांधी के बयान पर आपत्ति जताते हुए उनसे माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मग्रंथ पर टिप्पणी करने से पहले उसका सही तरीके से अध्ययन और उसके संदर्भ को समझना जरूरी है।
शंकराचार्य ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी बार-बार सनातन धर्म से जुड़े ग्रंथों को लेकर ऐसी टिप्पणियां करते हैं, जिन्हें धार्मिक भावनाओं के लिए अपमानजनक माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों की व्याख्या राजनीतिक लाभ या नुकसान को ध्यान में रखकर नहीं की जानी चाहिए।
पहले अध्ययन करें, फिर टिप्पणी करें
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि यदि राहुल गांधी को मनुस्मृति में लिखी किसी बात को लेकर आपत्ति है तो उन्हें पहले धर्माचार्यों से उसका अर्थ समझना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी धार्मिक ग्रंथ के किसी एक अंश को अलग करके उसकी व्याख्या करना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि धर्मग्रंथों को समझने के लिए उनके संदर्भ, उद्देश्य और परंपरा को जानना आवश्यक है। इसके बाद ही किसी विषय पर सार्वजनिक रूप से अपनी राय रखनी चाहिए।
माफी नहीं मांगी तो बहिष्कार की मुहिम
शंकराचार्य ने राहुल गांधी से अपने बयान को लेकर माफी मांगने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि राहुल गांधी अपने बयान के लिए क्षमा नहीं मांगते हैं तो हिंदू समाज से कांग्रेस के बहिष्कार की अपील करते हुए अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को धर्मग्रंथों का अपमान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उनके मुताबिक, धार्मिक ग्रंथ श्रद्धा और आस्था का केंद्र हैं और उनके बारे में टिप्पणी करते समय संवेदनशीलता बरतना जरूरी है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि चाहे कोई भी राजनीतिक पार्टी हो या व्यक्ति, धर्मग्रंथों के प्रति सम्मान बनाए रखना चाहिए।
महिलाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा पर भी बोले
इस विवाद के बीच शंकराचार्य ने महिलाओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मनुस्मृति में महिलाओं की सुरक्षा और परिवार की जिम्मेदारियों से जुड़े प्रावधानों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा और उनका भरण-पोषण परिवार की जिम्मेदारी मानी गई है।
उन्होंने सवाल उठाया कि किसी महिला को स्वतंत्रता देने की बात करते समय उसकी सुरक्षा और जिम्मेदारी को नजरअंदाज कैसे किया जा सकता है। उनके अनुसार, महिला की सुरक्षा और उसके सम्मान को सुनिश्चित करना भी समाज और परिवार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि बचपन में माता-पिता, विवाह के बाद पति और वृद्धावस्था में परिवार की जिम्मेदारी जैसे विषयों को केवल स्वतंत्रता के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, सुरक्षा और जिम्मेदारी दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है।
पुणे के कार्यक्रम में राहुल गांधी ने की थी टिप्पणी
यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ जब राहुल गांधी ने हाल ही में पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मनुस्मृति की आलोचना की थी। उनके बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।
अब शंकराचार्य की टिप्पणी के बाद विवाद और तेज हो गया है। एक ओर राहुल गांधी की ओर से मनुस्मृति और सामाजिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर धार्मिक संत उनके बयान का विरोध कर रहे हैं।
फिलहाल इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस के साथ-साथ धार्मिक और सामाजिक स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। आने वाले दिनों में राहुल गांधी की ओर से इस प्रतिक्रिया पर कोई जवाब सामने आता है या नहीं, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

