बरसात के मौसम में डेंगू का खतरा बढ़ जाता है और खासतौर पर बच्चे इसकी चपेट में जल्दी आ सकते हैं। डेंगू से पीड़ित बच्चे का तेज बुखार जब कम होने लगता है, तो माता-पिता अक्सर इसे बीमारी से राहत मिलने का संकेत समझ लेते हैं। लेकिन डेंगू में बुखार का उतरना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता। कई मामलों में बुखार कम होने के बाद के 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
इस दौरान कुछ मरीजों में बीमारी का गंभीर चरण शुरू हो सकता है। इसलिए बच्चे का बुखार कम होने के बाद निगरानी कम करने के बजाय उसकी सेहत पर पहले से ज्यादा ध्यान देना जरूरी है।
बुखार कम होने के बाद क्यों बढ़ सकता है खतरा?
डेंगू के शुरुआती चरण में तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, उल्टी और भूख कम लगने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ दिनों बाद जब बुखार कम होने लगता है, तब शरीर में ऐसे बदलाव हो सकते हैं जिनकी वजह से रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ बाहर निकलने का खतरा बढ़ जाता है।
इस स्थिति में शरीर में रक्त का प्रभाव प्रभावित हो सकता है और ब्लड प्रेशर कम हो सकता है। गंभीर मामलों में यह स्थिति शॉक जैसी जानलेवा परेशानी का कारण बन सकती है। यही वजह है कि बुखार उतरने के बाद बच्चे की स्थिति को लगातार देखना बेहद जरूरी है।
बच्चे में इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डेंगू के दौरान बच्चे की सामान्य स्थिति पर विशेष नजर रखें। अगर बच्चा अचानक बहुत ज्यादा सुस्त हो जाए, लगातार बेचैनी महसूस करे या सामान्य तरीके से प्रतिक्रिया न दे, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
इसके अलावा लगातार उल्टी, तेज या लगातार पेट दर्द, पानी या अन्य तरल पदार्थ न पी पाना और पेशाब की मात्रा कम होना भी चिंता के संकेत हो सकते हैं। नाक या मसूड़ों से खून आना, सांस लेने में परेशानी, त्वचा का ठंडा या पीला पड़ना, अचानक अत्यधिक कमजोरी या बेहोशी जैसी स्थिति होने पर तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी है।
सिर्फ प्लेटलेट्स देखकर न समझें बीमारी की गंभीरता
डेंगू के मरीजों में प्लेटलेट्स की संख्या को लेकर परिवार के लोग अक्सर चिंतित रहते हैं। हालांकि, केवल प्लेटलेट्स की संख्या के आधार पर बच्चे की स्थिति का आकलन करना सही नहीं माना जाता।
डॉक्टर बच्चे के लक्षणों के साथ ब्लड प्रेशर, हेमाटोक्रिट, पेशाब की मात्रा, शरीर में पानी की स्थिति और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों को देखकर बीमारी की गंभीरता का आकलन करते हैं। इसलिए रिपोर्ट में प्लेटलेट्स कम होने या बढ़ने को अकेले बीमारी की स्थिति का पैमाना नहीं मानना चाहिए।
बिना सलाह के दवा देने से बचें
डेंगू के दौरान बच्चे को किसी भी तरह की दवा डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं देनी चाहिए। खासतौर पर दर्द या बुखार के लिए गलत दवा देना नुकसानदायक हो सकता है। प्लेटलेट्स बढ़ाने के नाम पर बाजार में उपलब्ध किसी दवा या घरेलू उपाय का इस्तेमाल भी बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं करना चाहिए।
बच्चे को पर्याप्त आराम देना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार तरल पदार्थ देते रहना महत्वपूर्ण है। पानी, चिकित्सकीय सलाह के अनुसार अन्य तरल पदार्थ और पौष्टिक भोजन बच्चे की स्थिति के मुताबिक दिया जा सकता है।
रिकवरी के दौरान भी जरूरी है निगरानी
बुखार कम होने के बाद बच्चे को तुरंत सामान्य दिनचर्या में नहीं लौटाना चाहिए। अगले कुछ दिनों तक उसकी गतिविधियों, खाने-पीने, पेशाब और व्यवहार पर नजर रखें। डॉक्टर ने अगर दोबारा जांच या फॉलो-अप की सलाह दी है, तो उसे टालना नहीं चाहिए।
डेंगू में सबसे जरूरी बात यह है कि बुखार का उतरना बीमारी के पूरी तरह खत्म होने की गारंटी नहीं है। इसलिए बुखार कम होने के बाद के 24 से 48 घंटे बच्चों के लिए विशेष सावधानी वाले हो सकते हैं। किसी भी गंभीर या असामान्य लक्षण की स्थिति में देरी किए बिना चिकित्सकीय मदद लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

