20 May 2026, Wed

भारत पर पश्चिम एशिया संकट का बुरा असर, UN ने 2026 के लिए GDP वृद्धि का अनुमान घटाकर 6.4% किया

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान में कटौती की है। संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग (UN DESA) द्वारा जारी नई रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में भारत की GDP वृद्धि दर 6.6 प्रतिशत के बजाय अब 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। हालांकि इसके बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल बना रहेगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया झटका दिया है। इससे दुनिया भर में आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हुई है, महंगाई का दबाव बढ़ा है और निवेशकों के बीच अनिश्चितता का माहौल बना है। इसका असर भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ रहा है।

UN DESA के आर्थिक विश्लेषण और नीति प्रभाग के वरिष्ठ अर्थशास्त्री इंगो पिटरले ने कहा कि भारत मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से पूरी तरह अछूता नहीं रह सकता। उन्होंने बताया कि भारत ऊर्जा का बड़ा आयातक देश है और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है। इससे भारत की आयात लागत बढ़ रही है, जिसका असर आर्थिक विकास और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार तेल की ऊंची कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से घरेलू महंगाई बढ़ सकती है और सरकार पर वित्तीय दबाव भी बढ़ेगा। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वैश्विक वित्तीय सख्ती और ऊंची ब्याज दरें भारत सहित कई देशों के लिए मौद्रिक नीति को जटिल बना रही हैं।

हालांकि संयुक्त राष्ट्र ने यह भी माना कि भारत की आर्थिक स्थिति अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत की वृद्धि को घरेलू उपभोक्ता मांग, सरकारी निवेश और सेवा क्षेत्र के मजबूत प्रदर्शन से समर्थन मिल रहा है। यही वजह है कि तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहेगा।

रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि 2027 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर फिर से बढ़कर 6.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात स्थिर होते हैं और तेल की कीमतों में नरमी आती है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था एक बार फिर तेज रफ्तार पकड़ सकती है।

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार 2026 के लिए वैश्विक GDP वृद्धि अनुमान को घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया गया है, जो जनवरी के अनुमान से 0.2 प्रतिशत कम है। इससे साफ है कि दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं इस समय दबाव में हैं।

अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आने वाले महीनों में भारत के लिए महंगाई नियंत्रण, ऊर्जा सुरक्षा और निवेश बढ़ाना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी। वहीं सरकार और रिजर्व बैंक की नीतियां भी आर्थिक विकास की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

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