18 Aug 2026, Tue

भारत की GDP ग्रोथ पर मंडराया खतरा! ईरान संकट, महंगा ईंधन और कमजोर रुपया से विकास दर 6.8% रहने का अनुमान

भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार को लेकर आने वाले समय में कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.8 प्रतिशत किया है। हालांकि एजेंसी ने अपने पिछले अनुमान को थोड़ा बढ़ाया है, लेकिन पश्चिम एशिया में जारी तनाव, महंगा कच्चा तेल, कमजोर रुपया और खाद्य महंगाई जैसे जोखिमों को लेकर चिंता जताई है।

पिछले वित्त वर्ष यानी 2025-26 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.6 प्रतिशत रही थी। ऐसे में नए अनुमान के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में विकास की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। Ind-Ra ने मई 2026 में FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7 प्रतिशत रखा था, जिसे अब बढ़ाकर 6.8 प्रतिशत कर दिया गया है।

वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी हाल ही में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने GDP ग्रोथ अनुमान को 6.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किया था। इससे साफ है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती के बावजूद वैश्विक घटनाक्रम भारतीय विकास दर के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

महंगा कच्चा तेल बढ़ा सकता है दबाव

Ind-Ra के मुताबिक वित्त वर्ष 2026-27 में कच्चे तेल की औसत कीमत करीब 85 डॉलर प्रति बैरल रह सकती है। हालांकि जून तिमाही में भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की औसत कीमत 101.31 डॉलर प्रति बैरल रही थी।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है। तेल महंगा होने से चालू खाते के घाटे पर दबाव बढ़ सकता है और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल समेत अन्य ईंधनों की कीमतों पर भी असर देखने को मिल सकता है।

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण अगर तेल की कीमतों में तेज उछाल आता है, तो महंगाई बढ़ने के साथ आर्थिक विकास की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

कमजोर रुपया और अल नीनो की चिंता

रेटिंग एजेंसी ने रुपये को लेकर भी चिंता जताई है। Ind-Ra के अनुमान के मुताबिक FY27 में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की औसत विनिमय दर 93.98 रुपये प्रति डॉलर रह सकती है। एजेंसी के अनुसार सालाना आधार पर रुपये में करीब 6.4 प्रतिशत की कमजोरी देखने को मिल सकती है।

इसके अलावा संभावित अल नीनो का असर भी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती बन सकता है। अल नीनो की वजह से मौसम और मानसून पर असर पड़ने की स्थिति में कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने और महंगाई का दबाव बढ़ने की आशंका है।

महंगाई और चालू खाते के घाटे का अनुमान

Ind-Ra ने वित्त वर्ष 2026-27 में खुदरा महंगाई औसतन 4.9 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। इसके मुकाबले FY26 में खुदरा महंगाई करीब 2 प्रतिशत रही थी। यानी आने वाले वित्त वर्ष में महंगाई का दबाव बढ़ने की संभावना जताई गई है।

वहीं, चालू खाते का घाटा GDP के 0.6 प्रतिशत से बढ़कर 1.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है। एजेंसी के अनुसार FY27 में भारत को करीब 70 अरब डॉलर का विदेशी कैपिटल फ्लो और विदेशी कंपनियों से मिलने वाले कर्ज के जरिए फंडिंग मिलने का अनुमान है।

कुल मिलाकर, भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, लेकिन वैश्विक तेल कीमतें, पश्चिम एशिया का तनाव, रुपये की कमजोरी और मौसम संबंधी जोखिम आने वाले समय में GDP ग्रोथ के लिए अहम चुनौती साबित हो सकते हैं।

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