काठमांडू: नेपाल में हाल ही में आई भीषण प्राकृतिक आपदा ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है, जबकि हजारों लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इस त्रासदी के बाद नेपाल सरकार ने सोमवार को राष्ट्रीय शोक दिवस मनाने का फैसला किया है। इस अवसर पर देशभर में सार्वजनिक अवकाश रहेगा और आपदा में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
बताया गया है कि 26 अगस्त को तिब्बत के नजदीक नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में आई विनाशकारी बाढ़ ने भारी नुकसान पहुंचाया था। अचानक आई बाढ़ के कारण कई इलाकों में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में घरों और दूसरी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा, जबकि कई परिवार अपने लोगों से बिछड़ गए।
हजारों लोग अब भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा के बाद राहत और बचाव कार्य लगातार जारी रहे। अब तक बड़ी संख्या में लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस आपदा में करीब 1340 लोगों की मौत हुई है, जबकि लगभग 5000 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। हजारों लोग बेघर होने के बाद मुश्किल परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
आपदा की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने पीड़ितों और मृतकों के सम्मान में राष्ट्रीय स्तर पर शोक मनाने का निर्णय लिया है। सोमवार को सरकारी संस्थानों में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दौरान अलग-अलग स्थानों पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
कई जगहों पर श्रद्धांजलि सभा
बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों को याद करते हुए नेपाल के अलग-अलग हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित की गई हैं। भारत-नेपाल सीमा के पास बीरगंज महानगरपालिका के घंटाघर चौक पर भी लोगों ने एकत्र होकर मृतकों को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान दिवंगत लोगों की आत्मा की शांति के लिए दीप प्रज्वलित किए गए।
इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों ने प्राकृतिक आपदा में जान गंवाने वाले नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त की। साथ ही प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता भी दिखाई गई।
आधा झुका रहेगा राष्ट्रीय ध्वज
नेपाल के गृह मंत्रालय के अनुसार, राष्ट्रीय शोक दिवस के दौरान देशभर के सरकारी कार्यालयों और विदेशों में मौजूद नेपाली राजनयिक मिशनों में राष्ट्रीय ध्वज आधा झुका रहेगा। यह फैसला आपदा में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति सम्मान और शोक व्यक्त करने के लिए लिया गया है।
आपदा को 13 दिन पूरे होने के बाद यह शोक दिवस मनाया जा रहा है। हिंदू परंपरा में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद 13वें दिन को शोक अवधि का महत्वपूर्ण दिन माना जाता है। ऐसे में सरकार के इस फैसले को मृतकों की सामूहिक स्मृति और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के तौर पर देखा जा रहा है।
नेपाल इस समय इस बड़ी आपदा के प्रभाव से उबरने की कोशिश कर रहा है। प्रभावित इलाकों में राहत, बचाव और पुनर्वास से जुड़े प्रयासों के बीच सरकार के सामने लापता लोगों की तलाश और प्रभावित परिवारों तक सहायता पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है।

