12 Jun 2026, Fri

‘बच जाना ही सबसे बड़ी सजा बन गया’, AI-171 क्रैश के एकमात्र Survivor विश्वास कुमार रमेश का दर्दनाक सच

नई दिल्ली: एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 दुर्घटना को एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन इस भीषण हादसे के एकमात्र जीवित बचे यात्री विश्वास कुमार रमेश के लिए समय जैसे अब भी उसी दर्दनाक पल में ठहरा हुआ है। दुनिया उन्हें ‘मिरेकल मैन’ के नाम से जानती है, क्योंकि 260 लोगों की मौत वाले इस भयावह विमान हादसे में वह अकेले जीवित बचे थे। हालांकि, विश्वास का कहना है कि शारीरिक रूप से बच जाना उनकी कहानी का सिर्फ एक हिस्सा है, असली संघर्ष तो उसके बाद शुरू हुआ।

12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए उड़ान भरने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट AI-171 टेकऑफ के महज 32 सेकंड बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान अहमदाबाद स्थित बीजे मेडिकल कॉलेज परिसर में गिर गया था। इस हादसे में विमान में सवार 242 लोगों में से 241 यात्रियों और चालक दल के सदस्यों की मौत हो गई थी। इसके अलावा जमीन पर मौजूद 19 लोगों ने भी अपनी जान गंवाई थी। इस तरह कुल 260 लोगों की मौत हुई थी।

इस त्रासदी में ब्रिटिश-भारतीय नागरिक विश्वास कुमार रमेश चमत्कारिक रूप से जीवित बच गए थे। लेकिन हादसे में उनके भाई अजय की मौत हो गई थी, जो उसी विमान में यात्रा कर रहे थे। एक साल बाद भी विश्वास अपने भाई को खोने के दर्द और उस भयावह घटना की यादों से उबर नहीं पाए हैं।

पहली बरसी पर जारी अपने बयान में विश्वास ने कहा कि लोग अक्सर उन्हें भाग्यशाली मानते हैं क्योंकि वह जीवित बच गए, लेकिन उनकी मानसिक और भावनात्मक पीड़ा को बहुत कम लोग समझते हैं। उन्होंने कहा, “लोग देखते हैं कि मैं बच गया, लेकिन वे यह नहीं देख पाते कि बंद दरवाजों के पीछे मैं किन संघर्षों से गुजर रहा हूं। मुझे आज भी नींद नहीं आती, चिंता बनी रहती है और हादसे की यादें बार-बार सामने आ जाती हैं।”

40 वर्षीय विश्वास ने बताया कि पिछले एक वर्ष में उन्होंने अपनी जिंदगी को दोबारा पटरी पर लाने की कोशिश की है, लेकिन यह सफर बेहद कठिन रहा है। उनका कहना है कि कई बार वे सामान्य जीवन जीने की कोशिश करते हैं, लेकिन हादसे की यादें अचानक उन्हें घेर लेती हैं। उन्होंने कहा, “मैं जीवित रहने के लिए भगवान का शुक्रगुजार हूं, लेकिन सिर्फ जिंदा रह जाना पूरी कहानी नहीं है। इसके बाद जो कुछ मैंने झेला है, उसे शब्दों में बयान करना आसान नहीं है।”

विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े हादसों से बचने वाले लोगों में पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (PTSD), अवसाद और चिंता जैसी मानसिक समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। विश्वास की कहानी भी इसी सच्चाई को सामने लाती है कि किसी त्रासदी से शारीरिक रूप से बच जाना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि मानसिक घावों को भरने में कई साल लग सकते हैं।

AI-171 विमान हादसा भारतीय विमानन इतिहास की सबसे दर्दनाक घटनाओं में से एक माना जाता है। एक साल बाद भी यह हादसा न केवल पीड़ित परिवारों के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक दर्दनाक स्मृति बना हुआ है। वहीं, विश्वास कुमार रमेश की कहानी यह याद दिलाती है कि किसी त्रासदी के बाद जीवन बच जाना अंत नहीं, बल्कि एक नए और कठिन संघर्ष की शुरुआत भी हो सकता है।

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