भारत-सूरीनाम संबंधों के 50 साल पूरे, ‘परिवार’ जैसे रिश्तों पर जोर: एस. जयशंकर
परामारिबो: भारत और सूरीनाम के बीच कूटनीतिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर दोनों देशों ने अपने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत बनाने का संकल्प दोहराया है। इस खास मौके पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर सूरीनाम की आधिकारिक यात्रा पर हैं। राजधानी परामारिबो में उन्होंने कहा कि भारत सूरीनाम को केवल एक साझेदार नहीं, बल्कि “परिवार” के रूप में देखता है।
जयशंकर ने अपने दौरे से पहले स्थानीय अखबार टाइम्स ऑफ सूरीनाम में लिखे लेख में दोनों देशों के संबंधों को “मजबूत और बहुआयामी” बताया। उन्होंने कहा कि भारत और सूरीनाम के बीच सहयोग अब पारंपरिक सीमाओं से आगे बढ़कर बुनियादी ढांचे, व्यापार, क्षमता निर्माण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक विस्तारित हो चुका है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि दोनों देशों के बीच रिश्ते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और पारिवारिक भी हैं। इस संबंध को मजबूत करने में उच्च स्तरीय यात्राओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वर्ष 2023 में सूरीनाम के राष्ट्रपति चंद्रिकाप्रसाद संतोखी ने भारत का दौरा किया था, वहीं भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी सूरीनाम की यात्रा की थी।
भारत ने सूरीनाम के विकास में एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। भारतीय क्रेडिट लाइन के तहत कई परियोजनाएं पूरी की गई हैं, जिनमें परानाम से परामारिबो तक 161 केवी विद्युत ट्रांसमिशन लाइन, जल पंपिंग स्टेशन, निर्माण उपकरण और बिजली ढांचे का उन्नयन शामिल है। इसके अलावा, भारत ने तीन चेतक हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति और उनके रखरखाव में भी सहयोग किया है।
खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में भी भारत ने सूरीनाम की मदद की है। पिछले वर्ष भारत ने लगभग 425 मीट्रिक टन खाद्य सामग्री (करीब 1 करोड़ डॉलर मूल्य) उपलब्ध कराई थी। इसके साथ ही भारत समर्थित परियोजनाओं में बाढ़ चेतावनी प्रणाली, स्टेडियम निर्माण और शिक्षा व तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े कार्यक्रम शामिल हैं। जयशंकर ने बताया कि वह अपने दौरे के दौरान पैशन फ्रूट प्रोसेसिंग और पैकेजिंग यूनिट के उद्घाटन में भी शामिल होंगे, जिससे स्थानीय किसानों को लाभ मिलेगा।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी दोनों देशों के विचार काफी हद तक समान हैं। एस. जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार जैसे मुद्दों पर भारत और सूरीनाम का साझा दृष्टिकोण है। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और अंतरराष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन जैसी पहलों में सूरीनाम की भागीदारी को भी उन्होंने सराहा।
भारत और सूरीनाम के रिश्तों की जड़ें इतिहास में गहराई तक जुड़ी हैं। वर्ष 1873 में ‘लल्ला रूख’ जहाज के जरिए भारतीयों का सूरीनाम आगमन हुआ था, जिसने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों की नींव रखी। आज सूरीनाम में भारतीय मूल के लोग समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और वे हिंदी भाषा, सरनामी हिंदुस्तानी, बैठक संगीत तथा दिवाली और फागवा जैसे त्योहारों को जीवंत बनाए हुए हैं।
जयशंकर ने कहा कि सूरीनाम ने हिंदी भाषा के वैश्विक प्रचार-प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, खासकर 2003 में परामारिबो में विश्व हिंदी सम्मेलन की मेजबानी करके। उन्होंने दोहराया कि भारत के लिए सूरीनाम कोई दूर का देश नहीं, बल्कि एक परिवार है, और आने वाले वर्षों में यह रिश्ता और गहरा होगा।

