23 Sep 2026, Wed

नेशनल अवॉर्ड में स्पेशल मेंशन हासिल करने वाली मशहूर अभिनेत्री सावित्री श्रीधरन का निधन, 16 की उम्र से ही जीत रही थीं दिल

मलयालम सिनेमा और रंगमंच की जानी-मानी अभिनेत्री सावित्री श्रीधरन का 85 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने बुधवार को कोझिकोड स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते पिछले कुछ समय से उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही थी। उनके निधन की खबर सामने आने के बाद मलयालम फिल्म और थिएटर जगत में शोक की लहर है।

‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ से मिली खास पहचान

सावित्री श्रीधरन को 2018 में रिलीज हुई फिल्म ‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ में निभाए गए जमीला के किरदार के लिए खास तौर पर याद किया जाता है। इस फिल्म में उनके सहज और प्रभावशाली अभिनय ने दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों का भी ध्यान खींचा था।

जमीला के किरदार में उन्होंने भावनाओं को बेहद स्वाभाविक अंदाज में पर्दे पर पेश किया। उनके अभिनय की इसी खासियत ने उन्हें फिल्म जगत में अलग पहचान दिलाई। फिल्म में उनके काम के लिए उन्हें कई सम्मान भी मिले।

राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर हुआ सम्मान

सावित्री श्रीधरन को वर्ष 2019 में केरल स्टेट फिल्म अवॉर्ड में बेस्ट कैरेक्टर एक्ट्रेस का सम्मान मिला था। इसके अलावा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में भी उनके अभिनय को स्पेशल मेंशन के जरिए सम्मानित किया गया।

‘सुडानी फ्रॉम नाइजीरिया’ के बाद उन्होंने कई अन्य मलयालम फिल्मों में भी काम किया। इनमें ‘वलियांगडी’, ‘डाकिनी’, ‘मेरा नाम शाजी’, ‘वायरस’, ‘इट्टिमानी: मेड इन चाइना’, ‘पाडा’ और ‘पप्पन’ जैसी फिल्में शामिल हैं। अलग-अलग तरह के किरदारों में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता का परिचय दिया।

16 साल की उम्र में शुरू किया था रंगमंच का सफर

सावित्री श्रीधरन का अभिनय सफर फिल्मों से नहीं बल्कि थिएटर से शुरू हुआ था। उन्होंने महज 16 साल की उम्र में अमेच्योर थिएटर के जरिए अभिनय की दुनिया में कदम रखा। करीब दो दशक तक उन्होंने शौकिया रंगमंच से जुड़कर लगातार काम किया।

इसके बाद उन्होंने प्रोफेशनल थिएटर में कदम रखा और केरल की कई चर्चित नाट्य मंडलियों के साथ काम किया। लंबे समय तक मंच पर अभिनय करने के कारण उन्हें रंगमंच की बारीकियों का गहरा अनुभव हासिल हुआ। धीरे-धीरे वह केरल के थिएटर जगत में अपनी अलग पहचान बनाने में सफल रहीं।

रंगमंच पर भी छोड़ी अमिट छाप

सावित्री श्रीधरन के थिएटर करियर में कई महत्वपूर्ण नाटक शामिल रहे। वह प्रसिद्ध नाटककार के.टी. मोहम्मद की रचनाओं से भी जुड़ी रहीं। मंच पर उनकी मौजूदगी और संवाद अदायगी को काफी सराहा जाता था।

फिल्मों में आने के बाद भी रंगमंच से उनका जुड़ाव उनकी पहचान का अहम हिस्सा रहा। उन्होंने अपने लंबे करियर में थिएटर और सिनेमा दोनों माध्यमों में अभिनय किया और अलग-अलग भूमिकाओं के जरिए दर्शकों पर प्रभाव छोड़ा।

सावित्री श्रीधरन के निधन से मलयालम मनोरंजन जगत ने एक अनुभवी कलाकार को खो दिया है। मंच से शुरू हुआ उनका सफर फिल्मों तक पहुंचा और कई यादगार किरदारों के जरिए उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई।

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