2 Nov 2026, Mon

नहीं रहे दिग्गज फिल्ममेकर वेद राही, 93 साल की उम्र में ली अंतिम सांस, ‘गुल गुलशन गुलफाम’ से घर-घर में हुए थे मशहूर

मुंबई: भारतीय साहित्य, सिनेमा और टेलीविजन जगत से एक दुखद खबर सामने आई है। दिग्गज लेखक और फिल्ममेकर वेद राही का 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने रविवार सुबह महाराष्ट्र के ठाणे स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। उनके निधन से साहित्य और मनोरंजन जगत में शोक की लहर है। वेद राही को खास तौर पर दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक ‘गुल गुलशन गुलफाम’ के निर्देशन के लिए याद किया जाता है। इसके अलावा, डोगरी साहित्य और हिंदी सिनेमा में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

‘गुल गुलशन गुलफाम’ से घर-घर में मिली पहचान

वेद राही ने टेलीविजन की दुनिया में अपनी रचनात्मक प्रतिभा के दम पर खास पहचान बनाई। उनके निर्देशन में बना धारावाहिक ‘गुल गुलशन गुलफाम’ 1980 और 1990 के दशक में दर्शकों के बीच काफी लोकप्रिय रहा। इस कार्यक्रम ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई और टेलीविजन जगत में उनके काम को सराहना मिली।

लेखन और निर्देशन के क्षेत्र में उन्होंने अपनी अलग शैली विकसित की। उनकी रचनाओं में मानवीय भावनाओं, सामाजिक जीवन और संस्कृति से जुड़े पहलुओं को प्रमुखता मिलती थी। उनके लंबे रचनात्मक सफर ने साहित्य और मनोरंजन की दुनिया में एक महत्वपूर्ण स्थान बनाया।

डोगरी साहित्य में योगदान के लिए मिला साहित्य अकादमी पुरस्कार

वेद राही का नाम डोगरी भाषा के प्रमुख साहित्यकारों में शामिल रहा। उन्होंने अपनी मातृभाषा में लेखन के जरिए इस भाषा की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने में योगदान दिया। उनकी रचनाओं में स्थानीय संस्कृति, समाज और आम लोगों के जीवन से जुड़े अनुभव देखने को मिलते थे।

वर्ष 1983 में उनके कहानी संग्रह ‘आले’ के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। यह सम्मान डोगरी साहित्य में उनके योगदान की महत्वपूर्ण पहचान बना। इसके बाद वर्ष 2024 में उन्हें साहित्य अकादमी फेलोशिप भी प्रदान की गई। यह संस्थान के सर्वोच्च सम्मानों में गिनी जाती है।

उनकी साहित्यिक उपलब्धियों ने उन्हें केवल एक लेखक के रूप में ही नहीं, बल्कि डोगरी भाषा और संस्कृति के महत्वपूर्ण प्रतिनिधि के रूप में भी स्थापित किया।

हिंदी सिनेमा और टेलीविजन में भी छोड़ी छाप

वेद राही ने साहित्य के साथ-साथ फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। उनके काम में कहानी कहने की क्षमता और पात्रों की भावनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करने की विशेषता दिखाई देती थी।

उन्होंने अपने रचनात्मक कार्यों के माध्यम से अलग-अलग माध्यमों में योगदान दिया। उनके निर्देशन और लेखन को भारतीय मनोरंजन जगत की उस परंपरा का हिस्सा माना जाता है, जिसमें साहित्यिक संवेदनशीलता को पर्दे और टेलीविजन तक पहुंचाया गया।

ठाणे में हुआ अंतिम संस्कार

वेद राही का अंतिम संस्कार रविवार दोपहर ठाणे के कोपरी श्मशान घाट पर किया गया। वह अपने पीछे बेटियां गीतांजलि और पूनम तथा उनके परिवारों को छोड़ गए हैं। उनके निधन पर साहित्य अकादमी ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से श्रद्धांजलि दी।

साहित्य और मनोरंजन जगत के लिए बड़ी क्षति

वेद राही का निधन भारतीय साहित्य और मनोरंजन जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। डोगरी भाषा में उनके लेखन, हिंदी सिनेमा में उनके योगदान और लोकप्रिय टेलीविजन धारावाहिक के निर्देशन ने उन्हें विशिष्ट पहचान दिलाई।

उनकी रचनाएं और उनके द्वारा किए गए कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे। साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में उनके योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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