21 Jul 2026, Tue

दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हिंसा, सांसद चंद्रशेखर और समर्थकों पर लगे बड़े आरोप, यहां जानें

नई दिल्ली: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सोमवार को हुए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़प में कई लोग घायल हुए। मामले में दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस मामले में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के प्रमुख और सांसद चंद्रशेखर आजाद का नाम भी सामने आया है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे, जिससे हालात बिगड़ गए।

सोमवार रात पुलिस ने जंतर-मंतर को खाली करा दिया था, लेकिन देर रात कुछ प्रदर्शनकारी दोबारा वहां इकट्ठा हो गए। इसके बाद पुलिस ने इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

पुलिस ने लगाए गंभीर आरोप

पुलिस के अनुसार, सांसद चंद्रशेखर आजाद के साथ लगभग 8,000 से 10,000 प्रदर्शनकारी जय सिंह रोड पर एकत्र हुए थे और संसद की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे थे। आरोप है कि इस दौरान सड़क पूरी तरह जाम हो गई, जिससे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई।

पुलिस का कहना है कि जब अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से रास्ता खाली करने की अपील की, तब भीड़ में मौजूद कुछ लोगों ने हिंसक रुख अपना लिया। आरोप है कि उपद्रवियों ने पास की एक इमारत से टाइलें और पत्थर तोड़कर पुलिस पर फेंके, कांच की बोतलों और जूतों से हमला किया तथा सुरक्षा बलों को निशाना बनाया।

कई पुलिसकर्मी हुए घायल

दिल्ली पुलिस के अनुसार, हिंसा में 118 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं, जिनमें 6 आईपीएस अधिकारी भी शामिल बताए गए हैं। कई पुलिसकर्मियों को सिर, हाथ और पैरों में चोटें आई हैं और उनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में कराया गया।

घायल पुलिसकर्मियों का दावा है कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मौजूद थे जो माहौल खराब करने की नीयत से आए थे। उनका कहना है कि जब पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की, तभी अचानक पत्थरबाजी और अन्य हमले शुरू हो गए।

वरिष्ठ अधिकारियों पर भी हमला

पुलिस का आरोप है कि नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा और सेंट्रल डीसीपी रोहित राजबीर भी हिंसा के दौरान निशाने पर आए। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षा कर्मियों ने किसी तरह सुरक्षित बाहर निकाला।

वहीं डीसीपी के सुरक्षा अधिकारी (एसओ) श्रीनिवास गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस के अनुसार, उनके पैर की हड्डी टूट गई और हाथ में भी गहरी चोट आई है।

सुनियोजित हिंसा का शक

प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस को आशंका है कि हिंसा पूर्व नियोजित हो सकती है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ डिजिटल और सोशल मीडिया चैट की भी जांच की जा रही है, जिनके आधार पर यह पता लगाने की कोशिश होगी कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा की कोई पूर्व योजना बनाई गई थी या नहीं।

हालांकि, इस संबंध में जांच अभी जारी है और पुलिस ने किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी साक्ष्यों की जांच करने की बात कही है।

जांच जारी, सभी पक्षों पर रहेगी नजर

दिल्ली पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर ली है और घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, वीडियो रिकॉर्डिंग तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि हिंसा में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

नोट: इस मामले में लगाए गए आरोप पुलिस की एफआईआर और प्रारंभिक जांच पर आधारित हैं। आरोपों की न्यायिक या कानूनी पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आने के बाद ही अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

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