18 Apr 2026, Sat

“ढाक का तीन पात” साबित हुआ मुनीर का तीन दिवसीय ईरान दौरा, तेहरान ने दो टूक कहा-नहीं छोड़ेंगे परमाणु कार्यक्रम

पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर का हालिया ईरान दौरा किसी ठोस नतीजे के बिना समाप्त हो गया। तीन दिवसीय तेहरान यात्रा के दौरान उन्होंने ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने की कोशिश की, लेकिन ईरान ने अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया। इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम पर नरमी दिखाने के लिए राजी करना था। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से यह संकेत दिए जा रहे थे कि ईरान यदि अपने संवर्धित यूरेनियम को लेकर रुख बदलता है, तो क्षेत्र में तनाव कम हो सकता है। हालांकि, तेहरान ने साफ कर दिया कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम से पीछे नहीं हटेगा और न ही किसी दबाव में आकर अपने एनरिच्ड यूरेनियम को ट्रांसफर करेगा।

आसिम मुनीर 15 अप्रैल को तेहरान पहुंचे थे और उन्होंने वहां कई शीर्ष नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान उनकी मुलाकात ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ़ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से हुई। इसके अलावा उन्होंने सैन्य अधिकारियों के साथ भी क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीतिक मुद्दों पर चर्चा की।

पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा Inter-Services Public Relations (आईएसपीआर) के अनुसार, इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता को बढ़ावा देना था। बातचीत के दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, मौजूदा तनाव और लंबित विवादों के शांतिपूर्ण समाधान जैसे मुद्दों पर जोर दिया गया। हालांकि, इन चर्चाओं के बावजूद कोई ठोस समझौता सामने नहीं आ सका।

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस कूटनीतिक पहल के जरिए अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत करना चाहता था। लेकिन ईरान के सख्त रुख ने इस कोशिश को झटका दिया है। तेहरान पहले भी कई बार स्पष्ट कर चुका है कि उसका परमाणु कार्यक्रम राष्ट्रीय सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा हुआ है और वह इसे किसी भी सूरत में नहीं छोड़ेगा।

यह दौरा ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में एक सीमित युद्धविराम लागू हुआ है। ऐसे में पाकिस्तान की मध्यस्थता को एक अहम कदम माना जा रहा था, लेकिन परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। इससे यह भी संकेत मिलता है कि क्षेत्रीय राजनीति में जटिलताएं अभी बरकरार हैं और समाधान आसान नहीं है।

कुल मिलाकर, आसिम मुनीर का तेहरान दौरा कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता जरूर दिखाता है, लेकिन ठोस परिणाम न मिलने से यह प्रयास फिलहाल अधूरा ही नजर आता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पाकिस्तान आगे भी मध्यस्थता की भूमिका निभाता है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *