रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। JPSC और JSSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच तेज कर दी है। इस मामले में अभय तिवारी नाम का एक व्यक्ति जांच एजेंसी के केंद्र में है। सीआईडी का दावा है कि वह कथित परीक्षा नेटवर्क का प्रमुख संचालक हो सकता है और इसी आधार पर उससे पूछताछ की जा रही है।
राजधानी रांची के कचहरी रोड स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से सत्याग्रह पर बैठे हैं। प्रदर्शनकारी परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इसी बीच सीआईडी की कार्रवाई ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है।
13 साल में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का दावा
सीआईडी के अनुसार, अभय तिवारी ने पिछले 13 वर्षों में 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास कीं। जांच एजेंसी के मुताबिक इनमें पुलिस अवर निरीक्षक भर्ती, भारतीय नौसेना भर्ती, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), IRB कांस्टेबल, CRPF हेड कांस्टेबल, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL), JSSC PGT, JSSC CGL, JPSC की सहायक वन संरक्षक (ACF), वन क्षेत्र पदाधिकारी (FRO), खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी (FSO) और संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा जैसी भर्तियां शामिल हैं।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन परीक्षाओं में अभय तिवारी की वास्तविक भूमिका क्या थी और क्या इन भर्तियों में किसी तरह की अनियमितता या नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।
पत्नी और भाई की नियुक्तियों की भी जांच
जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया है कि अभय तिवारी की पत्नी और भाई दोनों झारखंड सरकार में कार्यरत हैं। सीआईडी इस पहलू की भी जांच कर रही है कि इन नियुक्तियों में किसी प्रकार की अनियमितता हुई या नहीं। फिलहाल एजेंसी ने इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, अभय तिवारी पहले एक निजी कंपनी टीडीपीएल में प्रबंधकीय जिम्मेदारी संभाल चुका था। बाद में वह झारखंड सरकार में गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत रहा। जांच एजेंसियां उसकी निजी और सरकारी भूमिकाओं के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल कर रही हैं।
टेंडर प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार, जिस अवधि में JSSC ने परीक्षा संचालन के लिए एजेंसियों से टेंडर आमंत्रित किए थे, उस समय टीडीपीएल भी संभावित रूप से इस प्रक्रिया में शामिल कंपनियों में थी। सीआईडी यह जांच कर रही है कि क्या परीक्षा संचालन से जुड़े किसी नेटवर्क और अभय तिवारी के बीच कोई संबंध था।
छात्र आंदोलन और बढ़ता दबाव
इस मामले को लेकर झारखंड में छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। विपक्षी दल भी सरकार पर पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव बना रहे हैं।
फिलहाल सीआईडी की जांच जारी है और एजेंसी दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों तथा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है।

